रांचीः झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री और आजसू पार्टी के प्रधान महासचिव रामचंद्र सहित पार्टी के मुख्य प्रवक्ता देवशरण भगत को मुख्यमंत्री आवास घेराव मामले में अदालत से राहत नहीं मिली है.
अपर न्यायाधीश आयुक्त अमित शेखर की अदालत ने डिस्चार्ज पिटीशन खारिज किए जाने के खिलाफ दायर उनकी क्रिमिनल रिवीजन याचिका को भी खारिज कर दिया है.
इस मामले की सुनवाई एमपी-एमएलए की विशेष कोर्ट में चल रही है. इस केस में आरोपियों के खिलाफ आरोप भी गठित हो चुका है.
इसी मामले में आजसू के प्रमुख सुदेश महतो, सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी, पूर्व विधायक शिवपूजन मेहता भी आरोपी हैं. इन सभी के खिलाफ चार्ज फ्रेम हो चुका है.
इन सभी पर सरकारी काम में बाधा डालने, ,निषेधाज्ञा का उल्लंघन समेत कई आरोप में रांची के लालपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है.
गौरतलब है कि वर्ष 2021 में ओबीसी आरक्षण बढ़ाने समेत कई मांग को लेकर आजसू पार्टी ने सीएम आवास घेराव का कार्यक्रम किया था. पार्टी के नेता और कार्यकर्ता मोराबादी मैदान में जुटे और जुलूस की शक्ल में मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ रहे थे. इस दौरान में पुलिस ने मोराबादी मैदान से आगे बढ़ने पर रोका. इसके बाद आजसू नेताओं की पुलिस से झड़प हो गई. बैरिकेड तोड़कर वे आगे बढ़ने लगे.
आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान भीड़ उग्र हो गई थी और सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए थे.
तत्कालीन अंचलाधिकारी विजय केरकेट्टा की शिकायत पर लालपुर थाने में सुदेश महतो, सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी, लंबोदर महतो, रामचंद्र सहिस, शिवपूजन महतो सहित छह नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था.
छह नेताओं में से एक गोमिया के पूर्व विधायक लंबोदर महतो को पुलिस की जांच में आरोप से मुक्त कर दिया गया.
इस मामले में लालपुर थाना में सरकारी काम में बाधा, निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया था.
