गढ़वाः गढ़वा जिले के बड़गड़ प्रखंड के सुदूर महुआटीकर गांव के एक आदिवासी बुजुर्ग को पेंशन के लिए तीन महीने तक बैंक दौड़ते रहने और इस दौरान बुजुर्ग की हुई मौत के मामले में ग्रामीण बैंक के मैनेजर को दोषी पाया गया है.
इसके बाद जिला प्रशासन ने शाखा प्रबंधक के खिलाफ कार्रवाई के लिए ग्रामीण महाप्रबंधक को पत्र भेजा है.
गढ़वा के उपायुक्त ने एक्स पर राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को यह जानकारी दी है.
इससे पहले सोशल मीडिया पर इस घटना के सामने आने के बाद सीएम ने घटना की जांच और दोषियों पर कार्रवाई के आदेश दिए थे.
75 वर्षीय रंजीत लकड़ा अपनी पेंशन के लिए ती महाने तक बैंक के चक्कर काटते रहे. केवाइसी के नाम पर उन्हें पेंशन का भुगतान नहीं किया जा रहा था.
मामला सामने आने के बाद एसडीएम की अगुवाई में एक जांच कमेटी बैठायी गई थी. जांच कमेटी को रंजीत लकड़ा की बहू फुलमनी लकड़ा ने बताया कि उन्होंने शाखा प्रबंधक कृष्ण कुमार से अपने ससुर की गंभीर हवाला देकर मानवीय आधार पर मदद की गुहार लगाई थी. तब प्रबंधक ने बैककर्मी नंदलाल से कहा कि इसे बाहर कर दो. वह रोते हुए घर आई.
इसके बाद स्थानीय जनप्रतिनिधि जब एकजुट होकर इसका विरोध किया तो बैंककर्मी घर पहुंचे और बिस्तर पर पड़े उनके ससुर का अंगूठा लगवाकर कागजी प्रक्रिया पूरी की. इसके बावजूद खाते से पैसे नहीं निकले. अगर समय पर पैसा मिल जाता तो उनका इलाज हो जाता.
जांच कमेटी ने बैंकर्मियों से भी पूछताछ की. दस्तावेज चेक किए. इसके बाद रिपोर्ट सौंप दी. जांच मे शाखा प्रबंधक आशिंक रूप से दोषी पाए गए हैं.
