प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को जालंधर, पंजाब से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यान से अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत पुनर्विकसित 75 रेलवे स्टेशनों को राष्ट्र को समर्पित किया. इसके साथ ही विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास कर देश के बुनियादी ढांचे को नई गति दी.
अमृत भारत परियोजना में झारखंड के भी दो स्टेशन- मुरी और पिस्का, रांची शामिल हैं.
राज्यपाल पहुंचे पिस्का स्टेशन
रांची के पिस्का स्टेशन परिसर में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, राज्य के मंत्री दीपक बिरुवा, राज्यसभा सांसद महुआ माजी, हटिया विधायक नवीन जायसवाल, दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक अनिल कुमार जैन, रांची रेल मंडल के मंडल रेल प्रबंधक के.एन. सिंह तथा वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्रेया सिंह सहित रेलवे के कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे.

पिस्का में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि अमृत भारत स्टेशन योजना केवल रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास की योजना नहीं, बल्कि आधुनिक, सुरक्षित, पर्यावरण-अनुकूल एवं यात्री-केंद्रित भारत के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है.
उन्होंने भारत की पहली हाइड्रोजन संचालित ट्रेन के शुभारंभ को स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास की दिशा में देश की ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन को दिखाई हरी झंडी
गौरतलब है कि शुक्रवार को ही प्रधानमंत्री ने जींद-सोनीपत के बीच देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाई. इसे उन्होंने हरित और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ी उपलब्धि बताया है.
उन्होंने कहा कि जींद और सोनीपत के बीच भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन से संचालित ट्रेन को हरी झंडी दिखाना देश के लिए गर्व का क्षण है.
उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारतीय रेलवे की तकनीकी क्षमता, नवाचार और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प का प्रतीक है.
स्थानीय संस्कृति से जुड़ाव
अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत देशभर के रेलवे स्टेशनों को स्थानीय कला, संस्कृति और विरासत के अनुरूप विकसित किया जा रहा है. झारखंड के पिस्का और मुरी स्टेशन का पुनर्विकास भी इसी सोच का हिस्सा है, जिससे यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलने के साथ-साथ क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को भी राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी.
