जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) ने अपने स्टूडेंट्स और प्रोफ़ेसरों को दिल्ली के जंतर-मंतर या उसके आसपास आयोजित होने वाली किसी भी सभा में शामिल होने से बचने की सलाह दी है.
जेएनयू के इस बयान पर भाकपा माले ने विश्वविद्यालय से कहा- आप एक यूनिवर्सिटी हैं, बीजेपी के प्रवक्ता नहीं. पार्टी ने एक्स पर पोस्ट कर जेएनयू प्रशासन पर बीजेपी के प्रवक्ता की तरह काम करने का आरोप लगाया है.
सीपीआई(एमएल) ने एक्स पर लिखा, “भारत का संविधान हर नागरिक को अभिव्यक्ति की आज़ादी, शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने और संगठन बनाने का अधिकार देता है.”
“यह मत भूलिए कि आप एक विश्वविद्यालय हैं, बीजेपी के प्रवक्ता नहीं.”
पार्टी ने आगे कहा, “विश्वविद्यालयों का काम इन संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना है, न कि उनके शांतिपूर्ण इस्तेमाल को हतोत्साहित करना है.”
दरअसल, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) ने शुक्रवार को अपने स्टूडेंट्स और प्रोफ़ेसरों को दिल्ली के जंतर-मंतर या उसके आसपास आयोजित होने वाली किसी भी सभा में शामिल होने से बचने की सलाह दी.
जेएनयू ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, “जेएनयू के शैक्षणिक समुदाय से जुड़े सभी लोगों को सलाह दी जाती है कि वे ज़िम्मेदारी से व्यवहार करें और अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा को प्राथमिकता दें. भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय के सार्वजनिक प्रदर्शनों से जुड़े निर्देशों के अनुसार, आपसे अनुरोध है कि नई दिल्ली के जंतर-मंतर या उसके आसपास होने वाली किसी भी सभा में भाग लेने या वहाँ जाने से परहेज़ करें.”
एक दिन पहले, गुरुवार को दिल्ली विश्वविद्यालय ने भी ऐसा ही एक बयान जारी किया था, जिसकी राहुल गांधी समेत कई नेताओं ने आलोचना की थी.
