रांची : झारखंड की नई उत्पाद नीति 2022 से जुड़े कथित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को ने फर्जी बैंक गारंटी जमा करने के मुख्य आरोपी मैनपावर सप्लायर नीरज सिंह का बयान दर्ज किया है.
पूछताछ के दौरान नीरज सिंह ने जांच एजेंसी को कई अहम जानकारी दी है. जांच एजेंसी को पचा चला है कि टेंडर हासिल करने के लिए फर्जी बैंक गारंटी का इस्तेमाल किया गया था.
इस खुलासे के बाद शराब नीति में हुई वित्तीय अनियमितताओं और अधिकारियों की सांठगांठ को लेकर जांच का दायरा और बढ़ गया है.
छत्तीसगढ़ से जुड़ी कंपनियों को काम
ईडी की जांच में यह बात सामने आई है कि वर्ष 2022 में नई उत्पाद नीति के तहत टेंडर की शर्तों में बदलाव किए गए थे. इसके बाद छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़ी कंपनियों ने झारखंड के शराब व्यवसाय में प्रवेश किया.
इनमें मुख्य रूप से मैनपावर सप्लाई का काम करने वाली दो कंपनियां- मेसर्स विजन हॉस्पिटैलिटी और मेसर्स मार्शन इनोवेटिव शामिल थीं. आरोप है कि दोनों कंपनियों ने नियमों को ताक पर रखकर और फर्जी दस्तावेजों के सहारे राज्य में करोड़ों रुपये का टेंडर हासिल किया था.
10 करोड़ की फर्जी बैंक गारंटी
जांच रिपोर्ट के अनुसार, विजन हॉस्पिटैलिटी ने 5.35 करोड़ रुपये और मार्शन इनोवेटिव ने 5.02 करोड़ रुपये की फर्जी बैंक गारंटी जमा की थी. इन दोनों कंपनियों द्वारा सौंपे गए बैंक गारंटी से संबंधित दस्तावेजों पर नीरज सिंह के ही हस्ताक्षर मौजूद थे.
इसके आधार पर ‘झारखंड राज्य बेवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड’ की खुदरा शराब दुकानों में मैनपावर सप्लाई का ठेका हासिल किया गया था. इसमें मार्शन इनोवेटिव को धनबाद जिले की जिम्मेदारी मिली थी, जबकि विजन हॉस्पिटैलिटी को हजारीबाग, कोडरमा और चतरा जिले का काम आवंटित किया गया था.
