रांचीः विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने ने राज्य में बालू घाटों के संचालन, होल्डिंग टैक्स वसूली और सड़क निर्माण परियोजनाओं की स्थिति पर सवाल खड़े करते हुए सरकार से जवाब मांगा है.
मरांडी ने कहा कि राज्य में 302 बालू घाटों की नीलामी के बावजूद 288 घाट बंद क्यों है. बालू चोरी के धंधे को बढ़ावा देने और इसे जारी रखने के लिये जानबूझकर इन बालू घाटों को नहीं खुलने दिया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय स्वीकृति, ग्रामसभा की अनुमति और प्रमाणपत्रों की प्रक्रिया पूरी कराने की जिम्मेदारी किसकी है.
मरांडी ने कहा, प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के सदस्य सचिव राजीव लोचन बख्शी की भूमिका और उनके स्तर पर लंबित काम का हिसाब सरकार सार्वजनिक करे. बालू घाटों की नीलामी कर देने से जनता का घर नहीं बनेगा, बालू उपलब्ध कराने से बनेगा.
सुनील कुमार के जिम्मे
मरांडी ने कहा कि सुनील कुमार के जिम्मे पथ निर्माण और नगर विकास जैसे अहम विभाग हैं. लेकिन 21 अगस्त से होल्डिंग टैक्स की वसूली बंद है और वैकल्पिक व्यवस्था का अता-पता नहीं! पुरानी एजेंसी का एग्रीमेंट समाप्त कर दिया, नई व्यवस्था तैयार नहीं की। 21 अगस्त से होल्डिंग टैक्स वसूली क्यों बंद है.
सरकार को पुरानी एजेंसी का समझौता समाप्त होने की जानकारी, संबंधित नगर निकाय सरकार को वसूली बंद रहने की अवधि, राजस्व नुकसान और वैकल्पिक व्यवस्था की स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि रांची की 1,410 करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाएं अधर में हैं. जनता रोज परेशानी झेल रही है. इसके साथ ही मरांडी ने 302 नीलाम घाटों में से 288 के बंद रहने के कारण और लंबित स्वीकृतियों की सूची सार्वजनिक करने की मांग रखी है. साथ ही कहा है कि बालू घाटों की
स्वीकृति प्रक्रिया, पर्यावरणीय स्वीकृति, ग्रामसभा की अनुमति और अन्य वैधानिक प्रक्रियाएँ पूरी करने की समयसीमा सरकार तय करे.
- बालू की उपलब्धता: वैध बालू घाटों से नियमित आपूर्ति, उचित दर और पारदर्शी परिवहन सुनिश्चित किया जाए.
- होल्डिंग टैक्स वसूली: 21 अगस्त से बंद वसूली तत्काल बहाल कर नई व्यवस्था की समयसीमा घोषित की जाए.
- राजस्व नुकसान: होल्डिंग टैक्स वसूली बंद रहने से हुए नुकसान और उसकी भरपाई का विवरण सार्वजनिक हो।
- सड़क परियोजनाओं की समीक्षा: 1,410 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति और प्रगति रिपोर्ट जारी की जाए.
- जनता को जानकारी: बालू घाटों, होल्डिंग टैक्स और सड़क परियोजनाओं की मासिक प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाए.
- लंबित मामलों की समीक्षा कर जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई की जाए.
मरांडी ने मुख्यमंत्री से कहा है कि अफसर फाइल पर टिप्पणी लिखकर आगे बढ़ जाएगा, लेकिन जनता आपके कार्यकाल पर फैसला लिखेगी. हर अधूरे काम पर अधिकारियों की ढाल बनेंगे, तो उनकी नाकामी का राजनीतिक हिसाब भी आपको ही चुकाना पड़ेगा.
