भाजपा ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए 111 उम्मीदवारों की अपनी दूसरी सूची जारी की, जिसमें पुरूलिया जिले के बाघमुंडी सीट से रहिदास महतो को उम्मीदवार बनाया गया है.
जाहिर तौर पर आजसू पार्टी की ताक-झांक और पैंतरेबाजी को इस बार बीजेपी नेतृत्व ने तवज्जो देना मुनासिब नहीं समझा.
2021 में बीजेपी ने यह सीट आजसू पार्टी के लिए छोड़ी थी. आजसू ने आशुतोष महातो को उम्मीदवार बनाया था. आशुतोष महतो टीएमसी के उम्मीदवार सुशांता महातो से हार गए थे.
टीएमसी के उम्मीदवार को 75245 वोट मिले थे. वहीं आजसू के आशुतोष 61,510 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे. कांग्रेस के पुराने नेता और विधायक नेपाल चंद्र महतो तीसरे नंबर पर थे.
अमित शाह भी प्रचार में आए थे
2021 के विधानसभा चुनाव में आजसू प्रमुख सुदेश महतो बीजेपी नेतृत्व को यह भरोसा दिलाने में कामयाब रहे कि उनके अपने विधानसभा क्षेत्र सिल्ली की सीमा से सटी पश्चिम बंगाल की कई सीटों पर आजसू- बीजेपी का गठबंधन प्रभावी हो सकता है.
साथ ही इन इलाके में कुर्मी वोटरों की संख्या भी अच्छी है. इससे आजसू, बीजेपी की बड़ी मददगार बन सकती है. भाजपा ने सुदेश की बातों पर भरोसा किया और एक सीट छोड़ दी.
दूसरा- सुदेश महतो की महत्वाकांक्षा पश्चिम बंगाल में पार्टी विस्तार का बहुत पहले से रहा है, लेकिन सच यह भी है कि वहां टीएमसी के दबदबा में आजसू कहीं से टिकती नजर नहीं आती. और न ही जमीनी स्तर पर संगठन है.
2021 में बाघमुंडी सीट पर आशुतोष महतो की अपनी पकड़ और भाजपा की नाव पर सवार आजसू ने 61 हजार वोट जरूर हासिल किए.
हालांकि तब (चुनाव के दौरान) भाजपा की पुरूलिया जिला कमेटी और भाजपा के सांसद आजसू को एक सीट दिए जाने से फ्री फील महसूस नहीं कर रहे थे.
झारखंड चुनाव के नतीजे ने मुश्किल में डाला
2024 के झारखंड विधानसभा चुनाव में भाजपा की सहयोगी आजसू का प्रदर्शन सबसे खराब रहा है.
बीजेपी ने आजसू के लिए 10 सीटें छोड़ी थी. इनमें सिर्फ मांडू की सीट पर पार्टी उम्मीदवार तिवारी महतो को 231 वोटों से जीत हुई. अलबत्ता सुदेश महतो भी सिल्ली से हार गए.
उधर भाजपा को भी चुनाव में बड़े सेटबैक का सामना करना पड़ा. 68 सीटों पर लड़ी पार्टी को 21 सीटों पर जीत मिली.
ताक-झांक शुरू, पर मौका नहीं
इधर कुछ महीनों से सुदेश महतो और पार्टी के नेताओं ने पश्चिम बंगाल के जंगल महाल वाले इलाके में आना- जाना फिर शुरू किया. बाकायदा झालदा, बाघमुंडी में बैठकें की जाने लगीं. पार्टी के कार्यालय खोले जाने लगे.
इसी सिलसिले में 22 फरवरी को बाघमुंडी में कार्यालय खोलकर सुदेश कार्यकर्ताओं में ऊर्जी भरने की कोशिशें की. झालदा शहरी इलाके में कई कार्यक्रमों में वे शिरकत करने लगे.
मतलब चुनावी आहट के साथ सुदेश महतो अपने कार्यक्रमों से यह जाहिर करने की कोशिशों में जुटे कि इस इलाके में आजसू का जनाधार है और मजबूत संगठन भी.
हालंकि इस बार के चुनाव में सीट के लिए सुदेश की भाजपा के शीर्ष स्तर पर या बंगाल यूनिट के साथ कोई बैठक या वार्ता की खबर सार्वजनिक नहीं हुई है.
बदलती परिस्थितियों में दूर बैठी बीजेपी नेतृत्व को भी सुदेश की पकड़ और रणनीति का अहसास अब हो चला है. मुमकिन है इसलिए ही बंगाल की बाघमुंडी सीट पर पार्टी ने उम्मीदवार उतारना अच्छा समझा.
इधर पश्चिम बंगाल के चुनाव में जंगल महाल की कई सीटों पर झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के प्रमुख और झारखंड में डुमरी से विधायक जयराम महतो भी अपने उम्मीदवार उतारने के लिए हवा का रुख भांप रहे हैं.
जयराम भी कुर्मी बहुल इलाकों में कई कार्यक्रम कर चुके हैं. भाजपा को बखूबी पता है कि झारखंड में जयराम, आजसू को झटका देकर तेजी से उभरे हैं. और भाजपा को भी समीकरण साधने में नुकसान हुआ है.
झारखंड प्रदेश भाजपा का एक धड़ा मानता है कि भविष्य में जयराम के साथ गठबंधन कहीं ज्यादा फायदे का सौदा होगा.
चुनावी नतीजों पर गौर करें, तो कुर्मी वोटरों पर बेशक जयराम की पकड़ सुदेश से कहीं ज्यादा और मजबूत दिखाई पड़ती है.
अब बीजेपी के मुंह मोड़ लेने के बाद बाघमुंडी सीट पर सुदेश महतो अपना उम्मीदवार देते हैं या नहीं या फिर पश्चिम बंगाल की कितनी सीटों पर अपने दम पर लड़ते हैं, यह देखना बाकी होगा.
