रांचीः झारखंड में चतरा जिले के लावालौग थाना पुलिस द्वारा मौट्रिक बोर्ड के एक 19 वर्षीय परीक्षार्थी को दस दिनों तक हिरासत में रखे जाने के मामले में एसपी सुमित अग्रवाल सोमवार को हाईकोर्ट में हाजिर हुए.
उनकी ओर से कोर्ट में केस डायरी प्रस्तुत की गई. कोर्ट ने उनसे पूछा है कि संबंधित थाना पुलिस ने बच्चों को 10 दिनों तक अवैध रूप से हिरासत में क्यों रखा. 24 घंटे में उसे मैजिस्ट्रेस के समक्ष पेश क्यों नहीं किया गया. इस मामले में जिम्मेदार पुलिस अधिकारी पर क्या कार्रवाई की गई है. छात्र की मैट्रिक परीक्षा छूट गई, उसके लिए कौन जिम्मेदार है.
न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद एवं न्यायमूर्ति एके राय की खंडपीठ में हुई इस सुनवाई में कोर्ट ने मौखिक तौर पर कहा, “पुलिस को आम जनता के बीच बेहतर छवि बनाने और विश्वास बढ़ाने की जरूरत है. अगर बच्चे को अनुसंधान के क्रम में पूछताछ के बाद छोड़ दिया जाता, तो समाज में एक अच्छा संदेश जाता. पुलिस का काम जनता को सुरक्षा देना है ना कि उन्हें प्रताड़ित करना. बच्चा हार्डकोर अपराधी नहीं था अगर वह दोषी होता तब उस मैजिस्ट्रेट के सामने प्रस्तुत कर सकते थे.”
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 27 फरवरी को निर्धारित की है. इस मामले में कोर्ट लड़के की मां की ओर से दायर हेवियस कॉर्पस की सुनवाई कर रही है.
