रांचीः झारखंड उच्च न्यायालय ने राज्य में काफी समय से लंबित निकाय चुनाव कराने को लेकर अदालती आदेशों का पालन नहीं करने के लिए बुधवार को मुख्य सचिव अलका तिवारी, गृह एवं कैबिनेट सचिव वंदना दादेल और पूर्व शहरी विकास सचिव विनय चौबे और अपर सचिव ज्ञानेंद्र कुमार के खिलाफ अवमानना का नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है.
न्यायमूर्ति आनंद सेन की अदालत बुधवार को पूर्व वार्ड पार्षद रोशनी खलखो द्वारा दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही थी. इस दौरान अदालत ने आदेश का पालन नहीं करने क लिए कड़ी फटकार लगायी.
अदालत ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए कहा कि जब अभिलेखों में अवमानना का मामला दर्ज हो, तो यह न्यायालय सीधे ही किसी व्यक्ति को दोषी ठहराते हुए आदेश पारित कर सकती है. लेकिन यह अदालत उक्त प्रक्रिया को अपनाने से परहेज करती है. इसलिए झारखंड हाइकोर्ट रूल 393 के तहत अवमानना का नोटिस जारी करने के निर्देश दिया जाता है.
मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को होगी और इस दौरान सभी अधिकारियों की अदालत में व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है. राज्य सरकार की ओर से फिर से समय मांगे जाने पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार लोकतंत्र का गला घोंट रही है और चुनाव कराने में जानबूझकर देरी कर रही है।
न्यायमूर्ति सेन ने पिछले साल जनवरी में सरकार को तीन सप्ताह में राज्य में नगर निकाय चुनाव कराने का आदेश दिया था. लेकिन अदालत के इस आदेश का अनुपालन नहीं किया है. इसके बाद 18 जुलाई और 2 सितंबर को हुई सुनवाई में भी सरकार केवल समय मांगती रही, लेकिन चुनाव की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी. समय लेकर टालमटोल की जाती रही. अदालत ने पाया कि राज्य सरकार जान बूझकर ट्रिपल टेस्ट का बहाना बनाकर आदेश को टाल रही है.
