रांचीः आदिवासी नेता और सरना धर्म की खातिर आवाज मुखर करने वाली निशा भगत की मौत पर आईआरएस अधिकारी और झारखंड की पूर्व पंचायती राज निदेशक निशा उरांव की प्रतिक्रिया सामने आई है. इसके साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया पर निशा भगत के साथ अपनी एक तस्वीर भी पोस्ट की है.
उन्होंने लिखा है, अंतिम जोहार बहिन.तुमने समाज के लिए आवाज़ उठाया और आज तुम क्रूर और संवेदनहीन सिस्टम की भेंट चढ़ गई.इस तंत्र ने इस कदर प्रताड़ित किया, इतना मजबूर कर दिया कि तुम्हें मौत को गले लगाना पड़ा. यह सिर्फ तुम्हारी मौत नहीं है, बल्कि यह हमारी उस बुलंद आदिवासी आवाज़ की सोची-समझी हत्या है जो इस व्यवस्था की आँखों में खटकती थी.
निशा उरांव ने आगे लिखा, “तुम्हारी आँखों का वो आखिरी दर्द, तुम्हारा मुझे वह आख़िरी फ़ोन कॉल – सीने में हमेशा खंजर की तरह चुभता रहेगा. जो भी परंपरा , धर्म और सामाजिक मुद्दों पर आवाज उठाता है उसे टारगेट किया जाता है.. अब समय आ गया है..सबकी जवाबदेही समाज तय करेगा.”
निशा भगत ने अंग्रेजी में एक कोट्स भी लिखा है- Time for ZERO TOLERANCE for ONLINE TROLLS , THREAT , BULLYING. यानी “ऑनलाइन ट्रोल करने वालों, धमकियों और दादागिरी (बुलिंग) के खिलाफ अब ज़ीरो टॉलरेंस (बिल्कुल भी बर्दाश्त न करने) का समय आ गया है.”
गौरतलब है कि निशा भगत भी सरना आदिवासियों के हक, अधिकार को लेकर सामाजिक स्तर पर सक्रिय रही हैं. सरना-सनातन के मामले में भी वे अक्सर बोलती हैं. कई मौके पर उन्हें सोशल मीडिया पर कई किस्म की टिप्पणियों का सामना करना पड़ता है, पर वे तर्कों तथा तथ्यों के साथ जवाब भी देती है.
निशा भगत ने आतहत्या कर ली
गौरतलब है कि निशा भगत ने रांची के पिठौरिया थाना क्षेत्र अंतगर्त डहूटोली स्थित आवास पर गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी रात कथित तौर पर आत्महत्या कर ली है. इससे पहले उन्होंने लाइव वीडियो जारी किया. इसमें इस हालात के लिए सिस्टम समेत कई लोगों पर गंभीर आरोप लगाती सुनाई पड़ रही हैं. वीडियो के वायरल होने पर सनसनी फैली है.
निशा भगत की आत्महत्या के बाद उनका शव शुक्रवार को रांची स्थित रिम्स अस्पताल लाया गया, जहां पुलिस की मौजूदगी में विशेष मेडिकल बोर्ड का गठन कर मजिस्ट्रेट की निगरानी में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की गई. पोस्टमार्टम के दौरान सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे. उनका अंतिम संस्कार शनिवार को गुमला (पैतृक घर) में किया जा रहा है.
