रांची। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने मंगलवार को लोक भवन, रांची में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के अंतर्गत भारत में उच्च शिक्षा एवं शोध करने आये विभिन्न देशों के विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के साथ संवाद करते हुए कहा कि भारत को प्राचीन काल से ही ज्ञान एवं शिक्षा की भूमि के रूप में जाना जाता रहा है. ज्ञान एवं संवाद देशों के बीच सेतु का निर्माण करते हैं और लोगों को एक-दूसरे के करीब लाते हैं.
इस मुलाकात में उन्होंने नालंदा एवं विक्रमशिला जैसे प्रसिद्ध शिक्षा केंद्रों की चर्चा की, जहां विश्व के विभिन्न क्षेत्रों से विद्यार्थी ज्ञान प्राप्त करने के लिए आते रहे हैं.
सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करेगा
उन्होंने कहा, ज्ञान एवं विचारों के आदान-प्रदान की यह समृद्ध परंपरा आज भी हमें प्रेरित करती है. राज्यपाल ने कहा कि श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल, इराक एवं अफ्रीकी तथा मध्य-पूर्व के देशों सहित विभिन्न देशों के विद्यार्थियों का भारत में अध्ययन एवं शोध करना भारत और उनके संबंधित देशों के बीच मजबूत शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाता है. भगवान बुद्ध एवं भगवान महावीर की धरती भारत ने विश्व को शांति, करुणा, अहिंसा एवं सद्भाव का संदेश दिया है। आज की दुनिया में इन मूल्यों की प्रासंगिकता और भी बढ़ गयी है.
झारखंड की समृद्ध विरासत
राज्यपाल ने झारखंड की चर्चा करते हुए कहा कि राज्य अपनी समृद्ध जनजातीय एवं सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य, वन, झरनों, पहाड़ियों एवं प्रचुर खनिज संपदा के लिए जाना जाता है. यह धरती धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा एवं अनेक स्वतंत्रता सेनानियों की भूमि है, जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में अपना अहम एवं उल्लेखनीय योगदान दिया। उन्होंने विद्यार्थियों से झारखंड में अपने प्रवास के दौरान राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक विरासत को समझने एवं अनुभव करने हेतु कहा.
राज्यपाल ने विद्यार्थियों से कहा कि वे भारत में अपने अध्ययन एवं शोध के साथ-साथ देश के इतिहास, विविध संस्कृति, परंपराओं एवं लोकतांत्रिक मूल्यों को भी समझने का प्रयास करें. उन्होंने कहा कि ये अनुभव उनकी शैक्षणिक यात्रा को समृद्ध करने के साथ-साथ जीवनभर मूल्यवान स्मृतियों के रूप में उनके साथ रहेंगे.
