रांचीः झारखंड प्रदेश बीजेपी ने हेमंत सोरेन सरकार की दूसरी पारी के एक साल होने पर एक आरोप पत्र जारी करते हुए कहा है कि सरकाकर ने झारखंड के साथ सिर्फ धोखा किया है. प्रदेश में लूट और करप्शन चरम पर है.
प्रदेश कार्यालय में आरोप पत्र जारी करते हुए बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार के 6 साल को झारखंड की बर्बादी का साल बताया. उन्होंने कहा कि इंडी गठबंधन ने विधानसभा चुनाव के समय जो सात गारंटी दी थी उसपर राज्य सरकार एक कदम भी आगे नहीं बढ़ी,बल्कि राज्य को वर्षों पीछे धकेल दिया.
आरोप पत्र जारी करने में कार्यकारी अध्यक्ष आदित्य साहू, प्रदेश संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह,मुख्य सचेतक विधायक नवीन जायसवाल,प्रदेश मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक, प्रदेश मीडिया सह प्रभारी योगेंद्र प्रताप सिंह, आरोप पत्र समिति के सदस्य रविनाथ किशोर भी शामिल थे.
1932 आधारित स्थानीय नीति
बीजेपी नेता1932 खतियान आधारित स्थानीय नीति लाने की पहली गारंटी को बड़ा धोखा बताया. और इस मुद्दे पर हेमंत सोरेन सरकार जनता को 6 वर्षों से ठग रही. यहां की भाषा संस्कृति का संरक्षण नहीं हो रहा, बल्कि 21 सदी में भी चंगाई सभा के नाम पर अंधविश्वास को बढ़ावा और संरक्षण देने में हेमंत सरकार जुटी है. उन्होंने चंगाई सभा को पूरी तरह बंद करने की मांग की.
दूसरी गारंटी मईयां सम्मान पर बोलते हुए उन्होंने कहा, “आज लाखों बहनों को धोखा दिया जा रहा है. वोट लेकर नाम काट दिए गए. ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं पोर्टल नहीं खुलने की शिकायत लेकर दर दर भटक रहीं कोई सुनने वाला नहीं.”
ओबीसी आरक्षण
बीजेपी का आरोप है कि सामाजिक न्याय की तीसरी गारंटी भी पूरी तरह फेल साबित हुई.पंचायत चुनाव बिना ओबीसी आरक्षण के हुए।निकाय चुनाव में भी कुछ नहीं हुआ। एस सी, एस टी आरक्षण पर भी धोखा दिया।
चौथी गारंटी जो खाद्य सुरक्षा की थी उसमें तो लूट ही लूट मची है. 450 रुपए में गैस सिलेंडर देने के वादे को तो सरकार के मंत्री ने सिरे से नकार दिया.
स्वास्थ्य बीमा और नौकरी
पांचवीं गारंटी, जिसमें 10 लाख नौकरी, 15 लाख का स्वास्थ्य बीमा का वादा भी झूठा निकला. बड़े समारोह में 8791 लोगों को नियुक्ति पत्र देकर सरकार ढिंढोरा पीट रही है जबकि पिछले 6 वर्षों में लगभग 30 हजार से ज्यादा कर्मचारी तो रिटायर हो चुके हैं. स्वीकृत पद से आधे कर्मचारी पदाधिकारी भी आज नियुक्त नहीं. इस सरकार ने दो लाख से अधिक पद समाप्त कर दिए.
कहा कि 2019 की उत्पाद सिपाही की दौड़ जून की गर्मी में राज्य सरकार ने कराई,19 बच्चे दौड़ते हुए मर गए।लेकिन आज तक लिखित परीक्षा नहीं हुई. यह सरकार नौकरी देने की बजाय युवाओं को धमकी दे रही है कि जो भ्रष्टाचार ,के खिलाफ बोलेगा उसे जेल भेजा जाएगा. यह सरकार अगर बेदाग है तो फिर परीक्षाओं के भ्रष्टाचार की सीबीआई जांच कराने से क्यों भाग रही है. सरकार की छठी और सातवीं गारंटी भी धोखा साबित हुई है.
घोटाले की झड़ी लगी है
बीजेपी ने आरोप पत्र में कहा है कि राज्य में शराब , जीएसएससी सीजीएल परीक्षा ,डीएमएफटी फंड, मैन पावर सप्लाई गृह विभाग सामग्री खरीद,स्पोर्ट्स किट,भवन निर्माण, सरकारी टेंडर प्रक्रिया,डिग्री,जन्म प्रमाणपत्र, सरकारी रिक्त पद,आपदा मोचन निधि,स्वास्थ्य विभाग में घोटाले की श्रृखंला लगी है. दूसरी तरफ अबुआ सरकार में आदिवासी समाज सर्वाधिक बदहाल है. राज्य में सर्वाधिक दुष्कर्म की वारदातें आदिवासी युवतियों के साथ हुई है. दुमका से चाईबासा तक आदिवासी प्रताड़ित हो रहे हैं.
