रांचीः राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेंद्र आर्युविज्ञान संस्थान (रिम्स) परिसर से अतिक्रमित अवैध निर्माण को हटाए जाने के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए प्राथमिकी दर्ज कर एसीबी से जांच कराने का आदेश दिया है. इसके साथ ही कोर्ट ने राजस्व अधिकारियों, रांची नगर निगम के अधिकारी, रेरा और अन्य संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच का भी आदेश दिया है.
दरअसल अतिक्रमण हटाए जाने के दौरान एक बड़े अपार्टमेंट और कई पक्के मकानों को भी ध्वस्त किया गया है. इन निर्माण को लेकर प्रभावित लोग सवाल खड़े करते रहे हैं कि इन जमीन पर दाखिल खारिज हो चुका है. रसीद भी कट रहा है. अपार्टमेंट या मकान बनाने के लिए नगर निगम से नक्शा भी पास हुआ है, इसी मामले में कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है कि रिम्स के लिए अधिग्रहित जमीन थी, तो किसी दूसरे के नाम उसका म्यूटेशन कैसे हुआ. कैसे नक्शा पास किया गया. और बैंक वालों ने कैसे लोन दिए. रेरा क्या करता रहा.
गौरतलब है कि झारखंड हाइकोर्ट ने रिम्स में मरीजों के बेहतर इलाज, बुनियादी सुविधा और परिसर से अतिक्रमण हटाए जाने को लेकर स्वतः संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए सख्त आदेश पारित किया है.
हालांकि अभी अनियमितताओं की गंभीरता को स्वीकार करते हुए खंडपीठ ने इस स्टेज पर जांच सीबीआइ को सौंपने से परहेज किया है. लेकिन खंडपीठ ने केस में हर नायारण लखोटिया का हवाला देते हुए कहा कि उपरोक्त आदेश से स्पष्ट होता है कि मामले की जांच के लिए सीबीआइ को सौंप दिया गया था. इस प्रकार वर्तमान परिदृश्य में यह खंडपीठ भी मामले की जांच सीबीआइ को सौंप सकती है. लेकिन फिलहाल हम जांच सीबीआइ को सौंपने से परहेज कर रहे हैं. वैसे राज्य स्तरीय जांच के नतीजों के आधार पर भविष्य में यह विकल्प खुला रहेगा. फिलहाल यह खंडपीठ राज्य पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ जांच करने का निर्देश दे रही है.
तब लोगों को कष्ट नहीं उठाना पड़ता
खंडपीठ ने कहा, “हमारा यह भी मत है कि यदि अधिकारी सतर्क रहते तो लोगों को कष्ट उठाना नहीं पड़ता, जो अब रिम्स की अधिग्रहित भूमि अर्थात सरकारी अधिग्रहित भूमि पर अवैध निर्माण के विध्वंस के कारण पीड़ित हैं. जिन लोगों के आवास ध्वस्त किए जा रहे हैं, वे मुआवजे के हकदार हैं. खंडपीठ ने कहा कि मुआवजे को दोषी अधिकारियों और बिल्डरों से वसूला जाना चाहिए, जिन्होंने सरकारी जमीन पर निर्माण की अनुमति दी या बहुमंजिला भवन का निर्माण किया.”
