रांचीः फरवरी में होने वाले शहरी निकायों के चुनाव को लेकर उम्मीदवारों के नाम के साथ समर्थन देने के सवाल पर बीजेपी परहेज करेगी. शुक्रवार को पार्टी कार्यालय में हुई सांगठनिक बैठक में चर्चा से ये संकेत उभरे हैं.
बैठक में प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कहा कि निकाय क्षेत्र में प्रशासनिक तंत्र हावी है. जनता की समस्याओं को सुनने वाला कोई नहीं. ऐसे में आगामी निकाय चुनाव में सेवाभावी और जन कल्याण को समर्पित राष्ट्रवादी सोच के प्रत्याशियों को जीत दिलाने केलिए संकल्पित होने की आवश्यकता है.
उन्होंने कहा कि भाजपा के कार्यकर्ता अपने-अपने निकाय क्षेत्रों में राष्ट्रवादी सोच वाले और विकास को समर्पित प्रत्याशियों को जीत दिलाने का प्रयास करेंगे.
उन्होंने कहा कि हेमंत सरकार हार की डर से चुनाव को दलीय आधार पर नहीं कराने की घोषणा की है. चुनाव को बैलेट से कराने की घोषणा के साथ इसे प्रशासनिक तरीके से प्रभावित करने की भी साजिश है. इस साजिश को नाकाम करना है.
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि प्रदेश में विकास शून्यता की स्थिति है. लेकिन निकाय चुनाव में ऐसे उम्मीदवारों को जीतने की जरुरत है, जो तुष्टिकरण में विश्वास नहीं करते हों. जिनकी सोच विकास के प्रति समर्पित हो और जो राज्य के निकाय क्षेत्रों को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने केलिए संकल्पित हों.
बैठक में संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह,पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, मधु कोड़ा, एसटी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष समीर उरांव,पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद दीपक प्रकाश,प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश प्रसाद सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और विधायक शामिल हुए.
गौरतलब है कि 23 फरवरी को झारखंड में 48 निकायों के लिए चुनाव कराए जाएंगे. चुनाव गैर दलीय आधार पर हो रहा है. साथ ही बैलेट पेपर पर कराए जाएंगे. निकायों में एक-एक पद के लिए राजनीतिक दलों से कई उम्मीदवार दावे ठोंक रहे हैं. साथ ही पर्चा भरना शुरू कर दिया है. इन हालात में बीजेपी ने खुलकर किसी उम्मीदवार के नाम को समर्थन देने से परहेज करना मुनासिब समझ रही है.
गुरुवार को गोविंदपुर में कार्यकर्ताओं के साथ एक बैठक में बाबूलाल मरांडी ने भी इसके संकेत दिए थे कि सीधे तौर पर किसी उम्मीदवार के नाम को समर्थन देने से पार्टी बचेगी. और न ही भाजपा के सांसद विधायक किसी प्रत्याशी के लिए खुलकर प्रचार करेंगे।
उन्होंने गुरुवार को गोविंदपुर में समाजसेवी शंभूनाथ अग्रवाल के आवास पर कहा कि निकाय चुनाव दलीय आधार पर नहीं हो रहा है, इसलिए पार्टी किसी खास नाम की घोषणा नहीं करेगी. कार्यकर्ताओं को आंतरिक रूप से समझने का प्रयास किया जाएगा, दल समर्थित एक ही प्रत्याशी मैदान में रहे और यदि एक से अधिक प्रत्याशी मैदान में रहेंगे तो आकलन कर मजबूत प्रत्याशी को आंतरिक समर्थन दिया जाएगा.
