रांचीः प्रवर्तन निदेशालय ने झारखंड के ग्रामीण विकास में हुए बहुचर्चित टेंडर घोटाले, कमीशनखोरी तथा मनी लाउंड्रिंग से जुड़े मामले में पांचवीं सप्लीमेंट्री चार्जशीट में ग्रामीण कार्य विभाग के और 12 इंजीनियरों को आरोपी बनाया है.
इसके साथ ही ईडी की जांच में यह स्थापित हुआ है कि लगभग 3048 करोड़ के टेंडर के निष्पादन में 90 करोड़ से अधिक के कमीशन तत्कालीन ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम, तत्कालीन विभागीय सचिव तथा चीफ इंजीनियर व उनके मातहत इंजीनियरों ने लिए.
ईडी की जांच में यह भी स्थापित हुआ कि ग्रामीण कार्य विभाग, जेएसआरडीए के भीतर एक व्यवस्थित कमीशन-रिश्वतखोरी का रैकेट चल रहा था, जिसके तहत निविदा आवंटन के बदले ठेकेदारों से कुल निविदा मूल्य का 3 प्रतिशत का निश्चित कमीशन वसूला जाता था
कमीशन का वितरण मंत्री, सचिव और इंजीनियरों की हैसियत के पदानुक्रम के अनुसार किया गया. इनमें 1.35 प्रतिशत मंत्री को उनके निजी सचिव संजीव कुमार लाल के माध्यम से दिए गए. जबकि 0.65 से 1.0 प्रतिशत विभाग के सचिव को और शेष चीफ इंजीनियक और उनके अधीनस्थ इंजीनियरों को दिए गए.
12 और इंजीनियर आरोपी
ईडी ने रांची स्थित पीएमएलए की विशेष अदालत में 17 मार्च को पांचवी पूरक चार्जशीट दाखिल की है. यह चार्जशीट ग्रामीण कार्य विभाग के 14 नए इंजीनियरों के विरुद्ध दाखिल की गई है.
ईडी ने दाखिल चार्जशीट में जिन्हें आरोपित बनाया है, उनमें सेवानिवृत्त मुख्य इंजीनियर सिंगराई टुटी, राजीव लोचन, सुरेंद्र कुमार व प्रमोद कुमार तथा कार्यपालक अभियंता संतोष कुमार, अजय कुमार, अजय तिर्की, राज कुमार टोप्पो, अशोक कुमार गुप्ता, सिद्धांत कुमार व अनिल कुमार (सेवानिवृत्त) के अलावा सहायक अभियंता राम पुकार, राम व रमेश ओझा (दोनों सेवानिवृत्त) इनके साथ पूर्व अधीक्षण अभियंता/मुख्य अभियंता उमेश कुमार (सेवानिवृत्त) शामिल हैं.
मनी लॉन्ड्रिंग के तहत जांच के क्रम में ईडी ने पाया है कि ये इंजीनियर टेंडर आवंटन में अवैध तरीके से कमीशन की वसूली में लिप्त थे। वे कमीशन वसूले, जमा किया और उसे सभी संबंधितों, सीनियरों तक पहुंचाया.
ये सभी आरोपित इंजीनियर झारखंड सरकार के ग्रामीण कार्य विभाग, ग्रामीण विकास विशेष क्षेत्र व झारखंड राज्य ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण से संबद्ध रहे हैं। पांचवी चार्जशीट के साथ ही इस पूरे प्रकरण में आरोपितों की संख्या 36 हो गई है.
52 जगहों पर तलाशी
ईडी ने दाखिल चार्जशीट में कोर्ट को बताया है कि इस मामले में अब तक ईडी ने झारखंड, दिल्ली व बिहार में 52 जगहों पर तलाशी ली है.
इस केस में अब तक नौ लोगों को गिरफ्तार किया है. इनमें पूर्व मंत्री आलमगीर आलम, संजीव कुमार लाल के सहायक जहांगीर आलम अभी भी न्यायिक हिरासत में हैं.
अब तक तीन अस्थाई जब्ती के माध्यम से ईडी अब तक 44 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर चुकी है. इस पर एडजुकेडिंग अथारिटी की मंजूरी भी मिल चुकी है.
ईडी अलग-अलग अभियुक्तों के ठिकाने से लगभग 38 करोड़ रुपये नकदी भी जब्त कर चुकी है. इनमें संजीव कुमार लाल के ठिकाने से 32.20 करोड़ रुपये, ठेकेदार मुन्ना सिंह के ठिकाने से 2.93 करोड़ रुपये शामिल हैं.
इसके साथ ही ईडी ने आठ लग्जरी गाड़ियां भी जब्त की हैं। इससे पहले इस मामले में ईडी ने न्यायालय के सामने एक मुख्य चार्जशीट व चार पूरक चार्जशीट दाखिल की थी, जिसपर न्यायालय ने संज्ञान ले लिया.
ईसीआईआर के बाद
ईडी ने एसीबी जमशेदपुर में दर्ज कांड संख्या 13/2019 के आधार पर इंफॉर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज किया था.
यह मामला एक जूनियर इंजीनियर सुरेश प्रसाद वर्मा की दस हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तारी से जुड़ा हुआ था.
एसीबी ने तब तलाशी के दौरान तत्कालीन मुख्य अभियंता वीरेंद्र कुमार राम के ठिकाने से 2.67 करोड़ रुपये नकद बरामद किए थे.
ईडी ने जांच के क्रम में वीरेंद्र कुमार राम के भ्रष्टाचार की कमाई को उजागर किया था और बताया था कि ग्रामीण कार्य विभाग में टेंडर आवंटन में कमीशन से वीरेंद्र कुमार राम ने करोड़ों रुपये की संपत्ति अर्जित की थी.
