गुजरात में समान नागरिक संहिता यूसीसी विधानसभा में पास हो गया है. उत्तराखंड के बाद गुजरात दूसरा ऐसा राज्य है, जहाँ यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होने जा रहा है.
उत्तराखंड की तरह ही गुजरात के यूसीसी बिल में शादी, तलाक, विरासत, लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामलों में सभी धर्मों, पंथों, आस्थाओं, समुदायों के लिए एक जैसे कानून लागू किये जा सकेंगे.
यह बिल मंगलवार को मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने विधानसभा में पेश किया. इस बिल का मसौदा बनाने के लिए रिटायर्ड जज रंजन देसाई की अगुवाई में एक समिति बनाई गई थी.
बिल पेश होने से पहले उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने इसे ‘ऐतिहासिक’ बताया.
क़रीब साढ़े सात घंटे चली बहस के बाद जब बिल को वोटिंग के लिए रखा गया तो यह बहुमत से पास हो गया. वोटिंग के दौरान राज्य में मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस सदन से बाहर चली गई.
इस बीच गुजरात में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पारित होने पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की प्रतिक्रिया सामने आई है.
अमित शाह ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा कि उत्तराखंड के बाद अब गुजरात में भी यूसीसी पारित हो गया है.
उन्होंने लिखा, “देश में हर नागरिक के लिए एक समान क़ानून हो, यह भाजपा का स्थापना से ही संकल्प रहा है. मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा की राज्य सरकारें इस दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही हैं. मुझे खुशी है कि उत्तराखंड के बाद अब गुजरात ने भी समान नागरिक संहिता विधेयक पारित करने का ऐतिहासिक कार्य कर अपनी प्रतिबद्धता दर्शाई है.”
गृह मंत्री शाह ने लिखा, “देश तुष्टीकरण के आधार पर नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के लिए समान क़ानून से चले, यह हमारी प्राथमिकता भी है और संकल्प भी है.”
बीबीसी गुजराती के मुताबिक़, यह बिल मंगलवार को मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने विधानसभा में पेश किया. इस बिल का मसौदा बनाने के लिए रिटायर्ड जज रंजन देसाई की अगुवाई में एक समिति बनाई गई थी.
