हजारीबागः झारखंड में हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ थाना अंतर्गत कुसुंभा गांव में मंगला जुलूस देखने गई 12 साल की एक बच्ची की दरिंदगी के साथ हुई हत्या की घटना का पुलिस ने जो खुलासा किया है, वह रूह हिला देने वाला है. तंत्र- मंत्र के चक्कर में मां ने ही दो लोगों के साथ बच्ची की बलि दी थी. पुलिस ने बच्ची की मां और तंत्र-मंत्र करने वाली गांव की एक अन्य महिला और एक पुरूष को गिरफ्तार किया है.
हजारीबाग के डीआईजी अंजनी झा, एसपी अंजनी अंजन और डीसी शशि प्रकाश सिंह ने मामले में बुधवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में विस्तृत जानकारी दी है.
पुलिस अधिकारियों ने हत्या के पीछे अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र बताया गया है.
उन्होंने बताया कि इस जघन्य कांड में शामिल तीनों आरोपियों बच्ची की मां रेशमी देवी, एक अन्य महिला शांति देवी (भगताइन) और भीम राम को गिरफ्तार किया गया है.
25 मार्च को शव मिला था
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि 25 मार्च की सुबह गांव के मिडिल स्कूल के पीछे मैदान से बच्ची का शव मिला था. वह 24 मार्च की रात रामनवमी के मंगला जुलूस के दौरान लापता हो गयी थी. परिजनों के बयान पर विष्णुगढ़ थाना में अपहरण और हत्या का मामला दर्ज हुआ था.
26 मार्च को प्रशिक्षु आईपीएस नागरगोजे शुभम भाउसाहेब के नेतृत्व में एसआईटी गठित की गई थी. जांच में अंधविश्वास से जुड़े तथ्य सामने आये. गांव की एक कथित भगताइन ने समस्या दूर करने के नाम पर बच्ची की बलि देने की सलाह दी थी.
बेटे की परेशानी और भगताइन
जांच में पूछताछ के दौरान भगताइन शांति देवी ने पुलिस को बताया कि मृतका की मां पिछले एक वर्ष से अपने बेटे सुधीर कुमार सिंह की परेशानी को लेकर उसके पास आती रही थी.
भगतान ने यह भी बताया कि उसने पूर्व में महिला के घर को तंत्र-मंत्र से बांधा भी था. शांति देवी ने बच्ची की मां को बताया था कि उसके बेटे की परेशानी को हमेशा के लिए दूर करने को लेकर किसी कुंवारी लड़की की बलि देनी होगी. इस पर मृतका की मां तैयार हो गयी.
पुलिस के अनुसार बच्ची की मां पिछले तीन माह में कई बार भगताइन से मिली भी थी, लेकिन भगताइन ने अष्टमी के दिन महिला को अपनी बेटी के साथ पूजा के लिए आने को कहा था.
मंगला जुलूस के दिन बलि
भगताइन ने बताया कि महिला अपने तीनों बच्चों को लेकर शाम सात बजे मंगला जुलूस में शामिल हुई थी. रात लगभग आठ बजे वह अपनी छोटी बेटी को लेकर उसके घर पहुंची. वहां उसने महिला को बताया कि रात नौ बजे के बाद अच्छा नक्षत्र है, तब उसमें देवास आयेगा.
इसके बाद उसने महिला को एक अन्य पुरुष के साथ छोटी बेटी को लाने के लिए कहा, क्योंकि बलि के समय धर-पकड़ के लिए एक आदमी की जरूरत पड़ती.
रेशमी देवी गांव के ही एक व्यक्ति भीम राम के साथ अपनी बच्ची को लेकर उसके घर पहुंची. महिला को पूजा के लिए 251 रुपये देने थे, लेकिन उसने 20 रुपये ही दिये.
तंत्र- मंत्र और खौफनाक खूनी खेल
भगताइन के अनुसार, उसने अपने घर में स्थित मनसा मंदिर के समक्ष बच्ची को बिठाकर कुछ तंत्र-मंत्र की साधना की. इसके बाद बच्ची को बांसबाड़ी (भूत बांधने का स्थान) ले गयी.
उसके साथ भीम राम व रेशमी देवी (बच्ची की मां) भी थी. यहां बच्ची को बिठा कर उसे जमीन पर सोने के लिए कहा गया. कर्मकांड पूरा होने के बाद बच्ची को प्लास्टिक पर सुलाया गया.
भगताइन के अनुसार, वह बांस की एक छड़ी लिये हुए थी. एसपी ने बताया कि भगताइन ने चारों तरफ इस छड़ी को घुमाया और मंत्र पढ़ कर बोली कि देवास आ गया है. उसे अब कुंवारी लड़की का खून चाहिए.
इस बात पर भीमा राम ने बच्ची का गला घोंट दिया. छटपटाने पर बच्ची की मां ने उसके दोनों पैर पकड़ लिये. जब उन्हें लगा कि बच्ची की मौत हो गयी, तब भगताइन ने छड़ी को बच्ची के शरीर के चारों तरफ घुमाया.
इसके बाद भगताइन के कहने पर भीम राम ने बच्ची के सिर पर पत्थर से मारा. बच्ची के सिर से निकले खून से भगताइन ने जमीन की लिपाई-पुताई व पूजा की.
कथित अवैध संबंध
एसपी अंजनी अंजन ने यहा भी बताया कि भीमराम और मृतका की मां रेशमी देवी के बीच पिछले कई वर्षों से अवैध संबंध था. रे
शमी के बच्चे उन्हें पिता के रूप में देखे थे. रेशमी देवी के पिता विनोद कुमार सिंह मुंबई में काम किया करते थे. पूरे परिवार पर भीमराम का एकाधिकार था.
एसपी ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार बच्ची के साथ दुष्कर्म की घटना नहीं घटी और न ही उसकी आंख निकाली गई थी.
इस पूरे मामले का स्पीडी ट्रायल करने की कोशिश की जाएगी, ताकि जल्द से जल्द आरोपियों के ऊपर कड़ी सजा हो सके.
हजारीबाग उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह ने कहा कि परिवार की संलिप्तता के कारण मुआवजा की राशि भी रोक दी गई है. उचित निर्णय लेकर आगे का कदम उठाया जाएगा.
