रामगढ़ः झारखंड के रामगढ़ जिले के गोला थाना क्षेत्र में शुक्रवार की अहले सुबह जंगली हाथियों के झुंड ने अलग-अलग स्थानों पर हमला कर तीन लोगों को मार डाला.
गोला वन क्षेत्र के बंदा, मुरपा एवं धोरधोरिया में जंगली हाथियों ने उत्पात मचाया है.
जानकारी के अनुसार, बंदा क्षेत्र में ईंट भट्ठा पर काम कर रहे तालाटांड पतरातू निवासी 25 वर्षीय धीरज भुइयां और कुजू निवासी 25 वर्षीय युगल भुइयां पर अचानक हाथियों के झुंड ने हमला कर दिया. इस हमले में दोनों की मौत हो गई.
वहीं, महुआ चुन रहे 70 वर्षीय श्याम देव साहू को भी अपनी चपेट में लेकर कुचल दिया, जिससे उनकी मौत हो गई.
इसके बाद धोरधोरिया सुतरी गांव में महुआ चुन रही एक महिला अदरी देवी 74 वर्ष को भी हाथी ने पटक कर घायल कर दिया. घायल महिला का प्राथमिक इलाज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोला में चल रहा है.
ग्रामीणों की मौत के बाद ग्रामीणों में भय और आक्रोश का माहौल है.
वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी घटना स्थल पर पहुंचे हैं.
वन विभाग के प्रभारी वनपाल योगेंद्र कुमार ने मृतकों के परिजनों को तत्काल 25-25 हजार रुपये मुआवजा दिया है.
पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है.
वैसे रामगढ़ में हाथियों के हमले में इंसानी मौत की यह पहली घटना नहीं है.
पिछले साल 17 दिसबर को रामगढ़ जिले के वेस्ट बोकारो थाना क्षेत्र में हाथियों दो महिलाओं और दो पुरुषों को कुचलकर मार डाला था.
इस घटना के बाद गुस्साए ग्रमीणों ने आरा काटा मुख्य चौक को पूरी तरह जाम कर दिया था.
आदिवासी, मजदूर, किसान
वन पर्यावरण मंत्रालाय और कई शोध तथा अध्ययन से सामने आए आंकड़ों के मुताबिक झारखंड में हाथियों की मृत्यु दर और मानव हताहतों की संख्या गंभीर स्तर पर पहुंच गई है, जिसका मुख्य कारण मानवजनित दबाव, व्यापक अवैध खनन और हाथियों के पर्यावास का क्षरण, जंगलों की कटाई है, जिससे हाथियों का पलायन तेज हो गया है.
हाथियों के कोरीडोर का दायरा बढ़ाने के साथ विखंडन मुक्त बनाने के प्रयास भी नाकाफी साबित हो रहे हैं.
झारखंड में हाथियों के हमले में सबसे ज्यादा आदिवासी छोटे किसान और मजदूर मारे जा रहे हैं.
इस साल के तीन महीनों में ही कम से कम 55 लोगों को हाथियों ने कुचलकर मार डाला है.
पिछले 26 मार्च को कोडरमा जिला मुख्यालय से करीब दो किलोमीटर दूर मरियमपुर गांव में हाथी ने उत्पात मचाया. इस दौरान मनिया बिरहोरीन को कुचल दिया, जिससे उनकी दर्दनाक मौत हो गई. वहीं, आरती बिरहोरीन नामक एक अन्य महिला इस हमले में घायल हो गई थीं.
इसके बाद मरियमपुर से हाथी नगर पंचायत अंतगर्त बोनाकाली महिला कॉलेज के पास पहुंचे, जहां 40 वर्षीय बालेश्वर सोरेन को भी कुचलकर मार डाला.
31 मार्च को गढ़वा जिले में हाथियों ने दो लोगों को कुचल कर मार डाला है.
पहला घटना रंका में हुई. दूसरी घटना धुरकी थाना क्षेत्र के कदवा उर्फ लिखनी धौरा गांव में हुई, जहां महुआ चुनने गए एक बुजुर्ग व्यक्ति की जंगली हाथी के हमले में मौके पर ही मौत हो गई. मृतक की पहचान 62 वर्षीय दईब कोरवा के रूप में हुई है.
हजारीबाग के चुरचू में
गौरतलब है कि पिछले फरवरी महीने में हजारीबाग जिले के चुरचू प्रखंड के गोंदवार में पांच हाथियों के झुंड ने सात लोगों को कुचलकर मार डाला था. इनमें एक परिवार के चार लोग शामिल थे. जान गंवाने वालों में दो मासूम बच्चे भी थे.
उधर जनवरी महीने में कोल्हान के चाईबासा में अलग अलग गांवों में एक हाथी ने कम से कम 22 लोगों को मार डाला था.
हाल ही में रांची जिले के राहे इलाके में हाथी के हमले में एक किसान की मौत हुई है.
तीन महीने में 55 लोगों की मौत
हाथियों के उत्पात में बड़े पैमाने पर फसलों और अनाज का नुकसान हो रहा है. हाथी ग्रामीणों के घरों को ढा रहे हैं. इस साल के तीन महीनों में हाथियों ने अलग- अलग जिलों में कम से कम 55 लोगों को मार डाला है.
आंकड़ों से पता चलता है कि झारखंड में पिछले पांच सालों में हाथियों द्वारा फसलों के नुकसान पहुंचाने के हर साल औसतन 9245 और अनाज क्षति के 1146 मामले दर्ज़ किए गए हैं.
किसानों के मुताबिक सैकड़ों घटनाओं की रिपोर्टिंग नहीं होती.
राज्य सरकार के वन विभाग के ही आंकड़े के मुताबिक पिछले चार वर्षों (2021-2025 मार्च) तक में हाथियों ने 397 लोगों की जान ली है.
जाहिर तौर पर हाथी-मानव संघर्ष को लेकर सुर्खियों में रहे झारखंड में आदिवासी, किसान, खेतिहर मजदूर एक बड़ी बेबसी से गुजर रहे हैं.
खासकर जंगलों-पहाड़ों से घिरे-सटे और तलहटी वाले गांवों के अलावा खनन क्षेत्रों में तबाही का अंतहीन सिलसिला जारी है. जान- माल की लगातार क्षति हो रही है.
