रांचीः झारखंड में हेमंत सोरेन की सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम उठाया है. बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में बहु-चिकित्सा प्रणाली आधारित “अबुआ दवाखाना” खोलने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है. इस योजना के तहत राज्य में 745 अबुआ दवाखाना स्थापित किए जाएंगे.
योजना के तहत राज्य के सभी 24 जिलों में मौजूद विभिन्न स्वास्थ्य उपकेंद्रों/आयुष्मान आरोग्य मंदिर/स्वास्थ्य विभाग के अन्य भवनों में बहु-चिकित्सा प्रणाली पर आधारित एकीकृत औषधि केंद्र (Integrated Medical Stores) “अबुआ दवाखाना की स्थापना की जाएगी.
“अबुआ दवाखाना” का उद्देश्य यह है कि ग्रामीण जनता को एलोपैथी, आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी एवं सिद्धा प्रणाली की आवश्यक औषधियों एक ही स्थान पर सुलभतापूर्वक रूप में उपलब्ध कलाना है।
सरकार का दावा है कि 745 एकीकृत औषधि केंद्रों के स्थापना से ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बढ़ेगी और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के प्रति लोगों का भरोसा भी मजबूत होगा.
अबुआ दवाखाना योजना के तहत अलग-अलग चिकित्सा पद्धतियों की जरूरी दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी. इसके लिए झारखंड एसेंशियल ड्रग लिस्ट और नेशनल आयुष एसेंशियल ड्रग लिस्ट के आधार पर दवाओं की सूची तैयार की जाएगी.
राज्यकर्मियों और पेंशनधारियों के लिए भत्ते में बढ़ोतरी
कैबिनेट ने राज्यकर्मियों और पेंशनधारियों के महंगाई भत्ते में वृद्धि के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है. अपुनरीक्षित छठा वेतनमान ले रहे कर्मियों और पेंशन भोगियों को अब 257 फीसदी की जगह 262 फीसदी और अपुनरीक्षित पंचम वेतनमान ले रहे कर्मियों और पेंशन भोोगियों को 474 फीसदी की जगह 483 फीसदी महंगाई भत्ता मिलेगा.
जबकि सप्तम वेतनमान ले रहे कर्मियों और पेंशन भोगियों को 58 फीसदी की जगह 60 फीसदी महंगाई भत्ता मिलेगा. यह एक जनवरी 2026 से प्रभावी होगा.
एक अन्य फैसले मेंअस्वस्थ और दिव्यांग कलाकारों की वृत्तिका के लिए उम्र सीमा का बंधेज समाप्त कर दिया गया है.
लोकहित में झारखण्ड सरकार द्वारा पुनर्वास/पुर्नस्थापन नीति के तहत विस्थापितों को आवंटित भू-भाग अथवा नागरिकों द्वारा सार्वजनिक उपयोग हेतु दान की गई भूमि के लिखत (दस्तावेज) पर मुद्रांक एवं निबंधन शुल्क से विमुक्ति दी गई.
इनके अलावा और कई प्रस्तावों को कैबिनेट की मंजूरी मिली है.
