झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच जेएसएससी-सीजीए के चयनित अभ्यर्थियों को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. अदालत ने जेएसएससी-सीजीएल नियुक्ति को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर रोक लगा दी है.
मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी.
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद परीक्षा के माध्यम से चयनित 1,932 अभ्यर्थियों की नियुक्ति और नौकरी पर तत्काल मंडरा रहा संकट फिलहाल टल गया है.
इससे पहले बुधवार को हाईकोर्ट ने जेपीएससी की 11वीं-13वीं नियुक्ति और फूड सेफ्टी की परीक्षा को रद्दद किए जाने पर रोक लगाया था.
दरअसल, सरकार के परीक्षा रद्द करने के निर्णय के बाद उन अभ्यर्थियों में असमंजस की स्थिति थी, जिन्होंने प्रतियोगी परीक्षा पास करने के बाद अलग-अलग सेवा में नियुक्ति हासिल की थी. सरकार द्वारा सीजीएल को रद्द किए जाने के बाद नौकरी कर रहे युवाओं ने तीन दिनों से आंदोलन का मोर्चा खोल रखा है.
सरकार के इस निर्णय के खिलाफ सीजीएल से चयनित अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया.
मेरिट वालों के साथ न्याय हो
चिका में अभ्यर्थियों की ओर से मुख्य रूप से यह तर्क दिया गया कि यदि परीक्षा में किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो जांच के जरिए यह पता लगाया जाना चाहिए कि इसमें कौन लोग शामिल थे. दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन पूरी परीक्षा और चयन प्रक्रिया को रद्द करने से उन अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित होगा, जिन्होंने अपनी मेहनत के दम पर परीक्षा पास की है.
अभ्यर्थियों की ओर से यह दलील दी गई कि चयन प्रक्रिया में उनकी कोई भूमिका नहीं थी. ऐसे में किसी कथित अनियमितता के लिए सभी सफल अभ्यर्थियों को जिम्मेदार मानना उचित नहीं होगा.
हाईकोर्ट की रोक के बाद फिलहाल चयनित अभ्यर्थियों को राहत मिली है. हालांकि, मामले का अंतिम फैसला अभी बाकी है और आगे की सुनवाई में अदालत पूरे विवाद पर विस्तृत रूप से विचार करेगी.
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर JSSC CGL समेत 22 परीक्षाओं को रद्द किया है. इनमें कई परीक्षाओं का रिजल्ट जारी हो गया है और नियुक्तियां भी कर ली गई हैं.
