नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में जल शक्ति मंत्रालय के विभागीय शिखर सम्मेलन राज्यों और केंद्र के बीच बेहतर समन्वय, अनुभवों के आदान-प्रदान तथा जल क्षेत्र की चुनौतियों के प्रभावी समाधान पर सार्थक चर्चा हुई.
दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने किया. इस सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी भाग ले रहे हैं.
बुधवार को समापन सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सभा को संबोधित करेंगे.
झारखंड के पेयजल स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद तथा जल संसाधन मंत्री हफीजुल हसन इस सम्मेलन में भाग ले रहे हैं.
झारखंड के लिए केंद्र से सहयोग की मांग
सम्मेलन के दौरान मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर नल से जल पहुंचाने की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े विषयों को प्रमुखता से रखा.
उन्होंने राज्य की पेयजल व्यवस्था की जरूरतों और योजनाओं के बेहतर संचालन के लिए केंद्र सरकार से आवश्यक सहयोग की मांग की.
उन्होंने कहा है, “जल योजनाओं को धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय, स्पष्ट निर्णय और समयबद्ध कार्ययोजना जरूरी है. सम्मेलन में हुए विचार-विमर्श और प्राप्त सुझावों के आधार पर जल सुरक्षा और विश्वसनीय पेयजल सेवा को मजबूत करने के लिए आगे ठोस रोडमैप तैयार किया जाएगा.”
गौरतलब है कि इस सम्मेलन का उद्देश्य राष्ट्रीय लक्ष्यों के लिए साझा जिम्मेदारी को बढ़ावा देना और यह सुनिश्चित करना है कि विचार-विमर्श से शासन और सेवा वितरण में मापनयोग्य सुधार हों. साथ ही यह शिखर सम्मेलन चार प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित है
- जल अवसंरचना परियोजनाओं का समय पर कार्यान्वयन
- जल संचय जन भागीदारी – कैच द रेन
- पेयजल प्रणालियों की स्रोत स्थिरता
- जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत ग्रामीण पेयजल आपूर्ति योजनाओं का संचालन एवं रखरखाव
इन परामर्शों से जल अवसंरचना परियोजनाओं में तेजी लाने, जल संरक्षण में जनभागीदारी बढ़ाने, स्थायी पेयजल स्रोतों को सुनिश्चित करने और ग्रामीण पेयजल सेवाओं की विश्वसनीयता और जवाबदेही में सुधार के लिए ठोस और समयबद्ध कार्रवाई होने की उम्मीद है.
