सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को छात्र प्रदर्शनों को लेकर देशभर में दर्ज एफ़आईआर को बंद करने का अहम आदेश दिया है.
कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि 20 जुलाई से 25 जुलाई के बीच हुए छात्र प्रदर्शनों के संबंध में किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में दर्ज एफ़आईआर पर आगे कार्रवाई या जांच नहीं की जाएगी.
इन सभी एफ़आईआर को हर उद्देश्य के लिए बंद माना जाएगा.
सुनवाई के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने दिल्ली में 5 सितंबर के लिए प्रस्तावित विरोध मार्च वापस लेने की बात भी कही.
सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की पीठ को इसकी जानकारी दी.
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू किए जाने के बाद यह फ़ैसला लिया गया है.
लाइव लॉ के अनुसार, सौरव दास मंगलवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष पेश हुए. पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे.
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि केंद्र (दिल्ली पुलिस) के साथ-साथ बिहार, असम, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र सरकारों ने छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में दर्ज एफ़आईआर रद्द करने के लिए आवेदन दाख़िल किए हैं.
तुषार मेहता ने यह भी आश्वासन दिया कि 20 से 25 जुलाई के बीच हुए विरोध प्रदर्शन से संबंधित घटनाओं को लेकर भविष्य में कोई नई एफ़आईआर दर्ज नहीं की जाएगी.
इधर सीजेपी के संयोजक अभिजीत दीपके ने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि आज वास्तविक अर्थों में न्याय हुआ है.
उन्होंने कहा कि यह फ़ैसला उन सभी लोगों के लिए न्याय है, जिन्होंने जंतर-मंतर समेत देशभर में नीट पेपर लीक के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई थी.
अभिजीत दीपके ने मीडिया से बातचीत में कहा, “मैं माननीय कोर्ट का धन्यवाद करना चाहता हूं क्योंकि आज सही मायने में न्याय हुआ है. यह उन सभी लोगों के लिए न्याय है, जो जंतर-मंतर पर लड़ रहे थे और उन बच्चों के लिए भी, जिन्होंने नीट पेपर लीक विवाद के दौरान आत्महत्या कर ली थी. आज उन परिवारों के साथ भी न्याय हुआ है, जिन्होंने पेपर लीक की वजह से अपने बच्चों को खो दिया.”
उन्होंने कहा, “मैं उन माता-पिता से माफ़ी मांगना चाहता हूं, जिनके बच्चों ने पेपर लीक की वजह से आत्महत्या की, हम उनके बच्चे बचा नहीं सके. मैं जानता हूं कि यह कमी कभी पूरी नहीं की जा सकती है. आप लोगों के बच्चों के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए था. मैं कई परिवारों से मिला हूं और उनसे कहना चाहता हूं कि हम माफ़ी मांगते हैं कि आपके बच्चों को जान गंवानी पड़ी, जबकि उनकी कोई ग़लती नहीं थी. बच्चों ने मेहनत और ईमानदारी से पढ़ाई की, लेकिन ये सरकार की विफलता की वजह से पेपर लीक हो गया.”
