रांची सिटीजन फोरम और हमर अधिकार मंच के अध्यक्ष तथा आरटीआई एक्टिविस्ट दीपेश निराला ने झारखंड राज्य सूचना आयोग और नवनियुक्त आयुक्तों के कामकाज को लेकर सिलसिलेवार तरीके से सवाल उठाए हैं.
उन्होंने कहा है कि 10 जून 2026 को झारखंड में चार सूचना आयुक्तों की नियुक्ति हुई तथा 1 जुलाई 2026 को चारों सूचना आयुक्तों को शपथ दिलाई गई.
निराला का कहना है, सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 नागरिकों को पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण अधिकार देता है. ऐसे में झारखंड राज्य सूचना आयोग के वर्तमान कामकाज और सार्वजनिक धन के उपयोग को लेकर को लेकर आम नागरिकों के मन में कुछ स्वाभाविक सवाल उठ रहे हैं.
फोरम ने सवाल उठाए
- क्या द्वितीय अपील वादों और शिकायत वादों की नियमित सुनवाई हो रही है.
- नवनियुक्त सूचना आयुक्तों के समक्ष अब तक कितने मामलों की सुनवाई हुई.
- कितने द्वितीय अपील वादों एवं शिकायत वादों का निष्पादन किया गया.
- यदि सुनवाई एवं निष्पादन अपेक्षित गति से नहीं हो रहा है, तो इसके प्रशासनिक कारण क्या हैं.
वेतन और भत्ता
निराला ने जारी बयान में बताया है कि वेतन एवं सुविधाओं के संबंध में उपलब्ध जानकारी के अनुसार एक सूचना आयुक्त को प्रतिमाह लगभग— बेसिक वेतन- ₹2,25,000, डीए-₹1,35,000, एचआरए — ₹45,000, कुल 4,05000 रुपये प्रतिमाह देय है.
इसके अतिरिक्त उपलब्ध नियमों/जानकारी के अनुसार अन्य सरकारी सुविधाएं भी देय हो सकती हैं.
गौरतलब है कि सरकार ने लंबे दिनों बाद राज्य में चार सूचना आयुक्तों- अनुज कुमार सिन्हा, तनुज खत्री, अमूल्य नीरज खलखो और शिवपूजन पाठक की नियुक्ति की है. पिछले एक जुलाई को राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने इन आयुक्तों को शपथ दिलाई थी.
इससे पहले राज्यपाल ने 10 जून को राज्य में चार सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी.
पांच साल के अंतराल के बाद राज्य सूचना आयोग अब कार्यशील हो गया है.
