पलामूः पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआऱ) को सुरक्षित रखने और वन्यजीवों को ट्रेनों की चपेट में आने से बचाने के लिए इस इलाके से गुजरने वाली रेलवे लाइन को कोर जोन से बाहर एक वैकल्पिक मार्ग (अलाइनमेंट) पर स्थानांतरित करने की कवायद तेज हुई है.
रेल मंत्रालय के दिशानिर्देशों के तहत रेल विकास निगम (RVNL) ने भारत सरकार के ‘परिवेश’ पोर्टल पर मौजूदा रेलवे लाइन को कोर जोन से बाहर एक वैकल्पिक मार्ग (अलाइनमेंट) पर स्थानांतरित करने का विस्तृत प्रस्ताव आधिकारिक तौर पर प्रस्तुत कर दिया है.
यह परियोजना पलामू टाइगर रिजर्व के बाघों, हाथियों और अन्य महत्वपूर्ण वन्यजीवों को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
पलामू टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश कांत जेना ने बताया है वन्य प्राणियों के संरक्षण में यह महत्वपूर्ण कदम साबित होगा. इससे वन्यजीवों की आबादी बढ़ने का भी मौका मिलेगा.
हेहेगरा और छीपादोहर स्टेशन नहीं होंगे बंद
इस योजना के बीच हेहेगरा और छीपादोहर रेलवे स्टेशनों को बंद या ध्वस्त किये जाने की खबरों को रेलवे ने निराधार बताया है.
यात्रियों की सुविधा के लिए मौजूदा स्थानों से मात्र 500 मीटर की दूरी पर नये और अपग्रेडेड रेलवे स्टेशन बनाये जायेंगे.
इन स्टेशनों में आधुनिक यात्री सुविधाएं, उन्नत प्रतीक्षालय और बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी. क्षेत्रीय विकास और आम जनता की मांग को देखते हुए पीटीआर प्रबंधन के विशेष अनुरोध पर रेलवे विभाग ने इस रूट पर एक अतिरिक्त रेलवे स्टेशन बनाने की मांग को भी मंजूरी दी है.
गौरतलब है कि पूर्व मध्य रेलवे के तहत छीपादोहर रेलवे स्टेशन झारखंड के लातेहार जिले में स्थित एक महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन है. यहाँ से पलामू एक्सप्रेस और शक्तिपुंज एक्सप्रेस और कई पैसेंजर ट्रेनें गुजरती हैं.
हेहेगरा भी इसी रूट पर है और ग्रामीण इलाके के लोगों के लिए यात्रा के लिहाज से महत्वपूर्ण है.
कॉरिडोर में बनेगी हाई-टेक सुरंग
परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी हिस्सा बेतला के पास स्थित संवेदनशील ‘चिकन नेक’ वन्यजीव गलियारे से होकर गुजरेगा. हाथियों और अन्य दुर्लभ वन्यजीवों की निर्बाध आवाजाही के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून की देखरेख और तकनीकी मार्गदर्शन में हाई-टेक सुरंग का निर्माण किया जायेगा.
जंगल और बस्तियां सुरक्षित
आधुनिक टनलिंग पद्धति से जमीन के ऊपर कोई खुदाई या निर्माण नहीं होगा. इससे जंगल का ऊपरी हिस्सा पूरी तरह सुरक्षित रहेगा.
हाथियों और बाघों के पारंपरिक कॉरिडोर में वन्यजीव बिना किसी रुकावट के आवाजाही कर सकेंगे.
इसके अलावा आसपास के ग्रामीण इलाकों और इंसानी बस्तियों को बिना विस्थापित किये रेलवे लाइन का अलाइनमेंट होगा.
