रांचीः झारखंड में चतरा स्थित सीसीएल की सबसे बड़ी कोयला खदान मगध और आम्रपाली में सुरक्षा की कमान सीआईएसएफ ने संभाल ली है. सोमवार को सीआईएसएफ के डीआईजी सुमंत सिंह ने सोमवार को दोनों क्षेत्रों का दौरा किया. इस दौरान उन्होंने तैनात अधिकारियों के साथ बैठक कर सुरक्षा व्यवस्था, संवेदनशील स्थानों, ड्यूटी पोस्ट, कोयला परिवहन और स्टॉक से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी ली.
जीरो कोल लीकेज प्लान के तहत इन दोनों खदानों से कोयले की चोरी, अवैध ट्रांसपोर्टिंग के लिए तैयार ब्लू प्रिंट को अमलीजामा पहनाने के लिए डीआईजी का यह दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
डीआईजी ने अधिकारियों को संवेदनशील एवं दुर्गम क्षेत्रों में नियमित निगरानी, प्रभावी गश्त और आकस्मिक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए है.
इसके साथ ही उन्होंने अवैध कोयला उत्खनन, संग्रहण एवं परिवहन पर एमएमडीआर एक्ट के प्रावधानों के तहत प्रभावी कार्रवाई के साथ स्थानीय लोगों में कानून के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया.
दौरे के दौरान सीआईएसएफ अधिकारियों ने सीसीएल की संपत्ति की सुरक्षा, संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान और कोयला चोरी रोकने को लेकर विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की.
इससे पहले सीआईएसएफ ने सीएचपी एवं पिपरवार चेक पोस्ट के आसपास के क्षेत्रों में छापेमारी कर 3.470 टन कोयला बरामद किया. बरामद कोयले का सीएचपी कांटा घर संख्या-11 में वजन कराने के बाद सीसीएल को सौंप दिया गया.
डीआईजी की बैठक में सीआईएसएफ के कमांडेंट अमित कुमार, उप कमांडेंट अजय कुमार पाण्डेय, सहायक कमांडेंट हर्ष लावणिया एवं मनोहर बरवाहा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे.

सबसे बड़े ओपन कास्ट ब्लॉक्स
चतरा जिले में स्थित सीसीएल की मगध और आम्रपाली परियोजनाएं उत्पादन और आर्थिक दृष्टि से देश के सबसे बड़े ओपन कास्ट ब्लॉक्स में शामिल हैं. अकेले आम्रपाली से रोज लगभग 70 हजार टन कोयले का उत्पादन होता है. आम्रपाली में शुरुआत में सीआईएसएफ के 200 जवान तैनात किये गये हैं, जिनकी संख्या बढ़ाकर 1700 तक की जायेगी. इस पूरे सुरक्षा घेरे की कमान और निगरानी के लिए डीआईजी स्तर के पद का आवंटन किया गया है.
कोल लीकेज प्लान
गौरतलब है कि अरबों रुपये के कोयले की चोरी पर नकेल कसने के लिए जीरो कोल लीकेज प्लान लाया गया है. इसी प्लान के तहत इन दोनों सबसे बड़ी कोयला खदानों की सुरक्षा सीआईएसएफ के हवाले की गई है.
खनन क्षेत्रों में अब ड्रोन सर्विलांस, वाहनों की जीपीएस ट्रैकिंग और वेइंग ब्रिज मॉनिटरिंग को इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर से जोड़ा गया है.
19 सितंबर को बोकारो में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में सेंट्रल कोल्ड फील्ड लिमिटेड के सीएमडी निलेन्दु कुमार सिंह तथा सीआईएसएफ के महानिदेशक प्रवीर रंजन के बीच हुए करारनामा में मगध-आम्रपाली कोल खदानों में सीआईएसएफ का पहरा लगाने का खाका खींचा गया है. इससे संबंधित सभी औपचारिकताएं भी पूरी कर ली गई हैं. डीजी ने बैठक में एमएमडीआर एक्ट के प्रभावी पालन पर विशेष जोर दिया है.
सीसीएल प्रबंधन की ओर से खदान की सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ कर्मियों के ऊपर होने वाले वित्तीय खर्च के राशि भुगतान की मंजूरी दे दी गई है.
