राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि भारत को तोड़ने की कोशिशे सफल नहीं होंगी. पिछले दशक में भारत का जो विकास हुआ उसकी वजह से भारत असुरी ताकतों का लक्ष्य बना है.
भागवत ने यह भी आगाह किया कि जब विरोध प्रदर्शन राजनीतिक होते हैं या उन्हें उकसाया जाता है, तो उनका इस्तेमाल तनाव, अराजकता और सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ने के लिए किया जाता है. आरएसएस प्रमुख ने कहा, “यह तूफ़ान पश्चिम से उठा है, जो व्यवस्था के हर स्वरूप के ख़िलाफ़ है.” भागवत ने भारत की विविधता और वैश्विक मंच पर देश के बढ़ते कद की सराहना की.
उन्होंने नागपुर में विजयादशमी के वार्षिक संबोधन में कहा, “भारत उनका मुख्य निशाना है, क्योंकि भारत प्रगति कर रहा है. इन ताक़तों को पता है कि पिछले कुछ दशकों में निर्णायक नीतियों के साथ भारत ने जिस तरह आगे बढ़ा है, उसे वे बाधित नहीं कर सकते… इसलिए वे भारत और संघ को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं.”
रिजिम चेंज के नाम पर
उन्होंने कहा है कि वैश्विक ताकतों ने भारत को निशाने पर ले लिया है और रिजिम चेंज के नाम पर अपना स्वार्थ साधना चाहते हैं. संघ प्रमुख ने कहा है कि पिछले दशक में भारत का जो विकास हुआ उसकी वजह से भारत असुरी ताकतों का लक्ष्य बना है.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को कहा, “पिछले दशकों में जिस प्रकार की दृढ़ नीति से भारत चला, उतने ही पक्के नेतृत्व ने उसको जिस प्रकार दृढ़ता से चलाया, उसके चलते और भारत के नई पीढ़ी में खासकर देशाभिमान अपने देश के लिए कुछ करना है, अपने देश का कुछ वैश्विक दायित्व है, इसका भान जगने के कारण जो समाज का पुरुषार्थ बना.”
इनके खेल बंद हो गए हैं
संघ प्रमुख ने कहा, “उसके कारण और इनके खेल बंद हो गए, ये आसुरी ताकतें जानती है और इसलिए भारत उनका लक्ष्य है. वो परिषदें करते हैं, भारत हिंदू और संघों को किस प्रकार तोड़ेंगे, डिस्मेंटलिंग ऐसा कहते हैं. और उनको सहायता भी मिल जाती है, उन्हीं के प्रकृति के कौशलों सर्वत्र हैं. क्षुद्र सत्ता स्वार्थ और विवेकहीनता के कारण महत्वाकांक्षी नेता भी उनको मिल जाते हैं.”
उन्होंने आगे कहा, “अब समाज बहुत बड़ा है, देश अपना अभी विकास कर रहा है, पूरा नहीं हुआ, तो समस्या रहेगी, समस्या रहती ही है और समस्या के चलते आंदोलन भी होते ही हैं और प्रजातंत्र में आंदोलन होंगे ही. परंतु आंदोलन किस लिए होने चाहिए? समाधान के लिए होने चाहिए.
सत्ता परिवर्तन नहीं होगा
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने भारत में सत्ता परिवर्तन नहीं होगा. उन्होंने व्यवस्था को ख़त्म करने की कोशिश कर रही ताक़तों पर भी निशाना साधा.
फ्रांस, अल्बानिया और बांग्लादेश में अशांति का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आंदोलनों का मक़सद समाधान तलाशना होना चाहिए.
आरएसएस प्रमुख ने कहा, “यह तूफ़ान पश्चिम से उठा है, जो व्यवस्था के हर स्वरूप के ख़िलाफ़ है.” भागवत ने भारत की विविधता और वैश्विक मंच पर देश के बढ़ते कद की सराहना की.
उन्होंने कहा, “आंदोलन का उद्देश्य समाधान है तो आंदोलन करने वाला कोई समूह हो या शांति सुव्यवस्था कायम करने के लिए कार्यवाही करने वाला शासन प्रशासन या राजनीतिक नेतागण हो. अपने एक अखंड समाज में हमारी करनी के कारण किसी प्रकार की अनबन द्वेष द्वेष मलाल या विभाजन पैदा नहीं होना चाहिए.”
