सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ‘डिजिटल न्यूज़ पब्लिशर्स एसोसिएशन’ (DNPA) द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी किया. इस याचिका में ‘डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023’ (DPDP Act) के प्रावधानों को चुनौती दी गई है. DNPA एक ऐसा संगठन है, जिसमें ‘द इंडियन एक्सप्रेस’, ‘द हिंदू’, ‘इंडिया टुडे’, ‘टाइम्स ग्रुप’, ‘ज़ी’, ‘NDTV’, ‘नेटवर्क 18’ जैसे 21 बड़े समाचार संगठनों के डिजिटल विंग शामिल हैं. एसोसिएशन का कहना है कि डीएनपीए के नियम प्रेस की आज़ादी पर बुरा असर डालते हैं.
सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश सीनियर वकील माधवी दीवान ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष कहा, “ये प्रावधान न्यूज़रूम को बंद कर देंगे. उन्होंने कहा, ‘अगर मुझे डेटा से जुड़े व्यक्ति की मर्ज़ी पर छोड़ दिया गया कि वह मंज़ूरी देगा या नहीं, तो ख़बरों का कॉन्सेप्ट ही ख़त्म हो जाएगा… ख़बरें नई होनी चाहिए. इससे न्यूज़रूम बंद हो जाएगा. अगर मुझे अनुमति और मंज़ूरी मांगनी पड़े, तो इसका क्या मतलब है?”
लाइव लॉ के मुताबिक़ ‘संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर इस याचिका में डीपीडीपी एक्ट की धारा 7, 17(2), 18, 19, 27, 29, 36, 37 और 44(3) को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है.’ याचिका में डीपीडीपी नियम, 2025 के नियम 16, 17 और 23 को भी चुनौती दी गई है.
CJI ने कहा कि याचिकाकर्ता केंद्र सरकार को सुरक्षा उपायों (Safeguards) के बारे में सुझाव दे सकते हैं. उन्होंने कहा, “आप इस क्षेत्र के विशेषज्ञ हैं. आप केंद्र सरकार और हमें यह बताने के लिए सबसे उपयुक्त व्यक्ति हैं कि आप डेटा के दुरुपयोग को कैसे रोकेंगे.”
सीनियर वकील ने जवाब दिया कि याचिका दायर करने के बाद संगठन ने केंद्र सरकार को एक प्रतिवेदन (Representation) सौंपा है. याचिका में कहा गया कि DNPA ने 10 अगस्त 2026 को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को विस्तृत प्रतिवेदन सौंपा था, जिसमें DPDP Act और नियमों के लागू होने को लेकर चिंताएं जताई गई थीं. इसके बाद, 25 अगस्त 2026 को DNPA के प्रतिनिधियों और मंत्रालय के अधिकारियों के बीच एक बैठक हुई.
