रांचीः आदिवासी नेता और सरना धर्म की आवाज उठाने वाली निशा भगत की आत्महत्या के बाद उनका शव शुक्रवार को रांची स्थित रिम्स अस्पताल लाया गया, जहां पुलिस की मौजूदगी में विशेष मेडिकल बोर्ड का गठन कर मजिस्ट्रेट की निगरानी में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की गई. पोस्टमार्टम के दौरान सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे.
घटना की सूचना मिलने के बाद निशा भगत के माता-पिता, भाई समेत अन्य परिजन रिम्स पहुंचे. पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया. परिजन शव लेकर गुमला के चैनपुर के लिए रवाना हो गए, जहां उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा. निशा भगत मूल तौर पर गुमला की रहने वाली थीं. फिलहाल रांची जिले के पिठौरिया थाना क्षेत्र के
इस पूरे मामले पर मुख्यालय-1 के डीएसपी ने बताया कि पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है. इसके साथ ही निशा भगत के मोबाइल फोन की भी जांच की जा रही है, ताकि घटना से जुड़े सुराग मिल सके.
डीएसपी ने बताया कि पुलिस की एक विशेष टीम निशा भगत के घर पहुंचकर आवश्यक साक्ष्य जुटा चुकी है. पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की जांच कर रही है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि घटना के पीछे जिन लोगों की भूमिका सामने आएगी, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा.
अजय तिर्की जैसे सरकार का संरक्षण- बाबूलाल मरांडी
बीच भाजपा नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की एक प्रतिक्रिया सामने आई है. उन्होंने कहा है कि आदिवासियों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाली निशा भगत की आत्महत्या ने झकझोर दिया. आत्महत्या से पहले उन्होंने फेसबुक लाइव में जो पीड़ा बयां किया, वो हृदय विदारक है. निशा भगत के शब्द न सिर्फ उनकी व्यक्तिगत पीड़ा थी, बल्कि उनके शब्द राज्य के हालात बयां करते है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी विधायक पत्नी कल्पना सोरेन मंचों से आदिवासियों के अधिकारों के लिए लड़ने का ऐलान कर समाज को गुमराह कर रहे हैं.
मरांडी ने आगे कहा, आदिवासी समाज के लिए आवाज उठाने वाले सूर्या हांसदा को पुलिस ने फर्जी मुठभेड़ में मार गिराया। निशा भगत को मरने को मजबूर कर दिया गया. ये मौत सिर्फ निशा भगत की नहीं है ये आदिवासी समाज की उम्मीदों ,आकांक्षाओं और सपनों की मौत है. जमीन हथियाने सहित प्राकृतिक संसाधनों की लूट लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य भर के सभी जिलों में दलालो की फौज खड़ी कर रखी है. अजय तिर्की जैसे कई दलाल राज्य भर में फैले है.सबकी पहचान आदिवासी समाज करे और अबुआ सरकार के नारों में उलझ कर अपने अस्तित्व को संकट में न डाले.

रिम्स पहुंचे केंद्रीय मंत्री संजय सेठ
निशा भगत के आत्महत्या की खबर मिलने पर केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ शाम में रिम्स पहुंचे. उन्होंने इस घटना के लिए सीधे तौर पर सरकार को जिम्मेदार ठहराया.
निशा भगत के आत्महत्या की घटना को लेकर को लेकर उन्होंने जमीन माफियाओं को खुली छूट देने और बिगड़ी कानून व्यवस्था का आरोप लगाया है. संजय सेठ ने पिठौरिया थाना प्रभारी को भी तत्काल सस्पेंड करने की मांग की है.
अजय तिर्की के इशारे पर पुलिस दबाव दे रही थी- सन्नी
निशा भगत की आत्महत्या की सूचना पाकर आदिवासी नेता सन्नी टोप्पो भी रिम्स पहुंचे. वहां उन्होंने निशा भगत की आत्महत्या के पीछे की वजह नगड़ी, कांके में स्थित एक जमीन को बताया है. उन्होंने कहा कि जमीन को लेकर पिछले कई दिनों से केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की के साथ विवाद चल रहा था. टोप्पो ने आरोप लगाया कि निशा भगत को लगातार स्थानीय थाना द्वारा दबाव दिया जा रहा था. मजबूर होकर महिला नेत्री निशा भगत ने आत्महत्या जैसी घटना को अंजाम दिया है.
