रांचीः बीजेपी नेता अनिल टाइगर की हत्या के खिलाफ रांची बंद का व्यापक असर देखने को मिल रहा है. झारखंड विधानसभा के बाहर बीजेपी के नेताओं ने हत्या के खिलाफ जमकर नारेबाजी की है. इसके वाद सदन की कार्यवाही शुरू होते ही बीजेपी विधायकों ने कानून व्ययवस्था को लेकर शोर-शराबा किया. बीजेपी और घटक दलों के विधायक इस घटना के विरोध में सरकार से इस्तीफा मांग रहे हैं. सदन की कार्यवाही 12.55 बजे तक स्थगित कर दी गई है.
उधर केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री और रांची के सांसद संजय सेठ घटना के विरोध में रातू रोड में धरने पर बैठ गये हैं. केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने कहा है कि राज्य में कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं रही है. जनप्रतिनिधि की हत्या दिनदहाड़े हो रही है और प्रशासन पंगु बना है. इससे पहले केंद्रीय मंत्री के साथ सैकड़ों कार्यकर्ता, समर्थक रातू रोड में जुलूस की शक्ल में निकले और हत्या के विरोध में नारेबाजी की.
इससे पहले बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी कोतवाली थाने पहुंचे और पुलिस वालों से पूछा कि बीजेपी के कार्यकर्ता जब शांतिपूर्वक बंद कराने शहर में निकले हैं, तो उन्हें पकड़ कर थाने में क्यों बैठाया गया है.

संजय सेठ ने कहा कि रांची की इतनी दुर्भाग्यपूर्ण और भयावह स्थिति पहले कभी नहीं थी. सरकार राजधानी में कुछ भी करने की स्थिति में नहीं है. ऐसा लग रहा है जैसे यहां अपराधियों का शासन चल रहा है. जब सरकार निरंकुश हो जाए तो उस पर अंकुश लगाने के लिए जनता को सड़कों पर उतरना पड़ता है. उन्होंने रांची के नागरिकों से बंद को पूर्ण समर्थन देने की अपील की.
गौरतलब है कि बुधवार को कांके चौक पर अनिल टाइगर की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. वे कांके रामनवमी समिति के अध्यक्ष भी थे. शांत और सरल स्वभाव के अनिल टाइगर शहर के अलावा ग्रामीण इलाके में लोगों के बीच लोकप्रिय थे.
किनके संरक्षण में अपराधी बेखौफ हैंः अर्जुन मुंडा
इधर पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि यह घटना न सिर्फ झकझोरने वाली है, बल्कि यह साबित करती है कि राज्य में अपराधियों का मनोबल अब कानून-व्यवस्था से कहीं ऊपर हो चुका है. राज्य में लगातार हो रही ऐसी घटनाएं यह सवाल उठाती हैं कि आखिर किसके संरक्षण में ये अपराधी बेखौफ घूम रहे हैं? क्या राज्य सरकार की कानून-व्यवस्था पूरी तरह विफल हो चुकी है? आम जनता का असुरक्षित महसूस करना और अपराधियों का बेलगाम होना राज्य सरकार की नाकामी को दर्शाता है.
