रांचीः अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय सचिव केडी सिंह एवं राज्य कार्यकारणी सदस्य अजय कुमार सिंह ने कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय दिल्ली के डिप्टी कमिश्नर से मिलकर झारखंड में कृषि निदेशालय के कार्यकलाप पर गंभी सवाल खड़े करते हुए पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है.
किसान सभा का आरोप है कि झारखंड में कृषि निदेशालय में भ्रष्टाचार चरम पर है. डिप्टी कमिश्नर को सौंपे ज्ञापन में बताया गया है कि झारखण्ड कृषि निदेशालय द्वारा वर्ष 2023 में 14 कंपनियों को गंभीर अनियमितता के कारण काली सूची में दर्ज किया गया था, जिन्हें 30 दिनों के अंदर तार्किक आदेश देकर मुक्त कर दिया गया.
तार्किक आदेश की पहली शर्त थी कि सभी कृषकों के यहाँ लगे कम गुणवत्ता वाले उपकरणों के बैच नंबर बदलकर पुनः CIPET से जाँच कराकर जाँच प्रतिवेदन कृषि निदेशक, राँची को समर्पित करना था, जो आज तक अप्राप्त है. शर्तों का अनुपालन नहीं होने पर इन कंपनियों को काली सूची में ही माना जाना था, लेकिन इन्हें पुनः कार्यादेश दिया गया और करोड़ों का भुगतान किया गया?
इन 14 कंपनियों पर सवाल
किसान सभा ने केंद्रीय अधिकारी को सौंपे शिकायत पत्र में बताया है कि कथित तौर पर मोहित इंडिया, मेक नाउ इंडस्ट्रीज, ग्लोबल मैकेनिकल इक्विपमेंट, प्रीमियर इरिगेशन एग्रीटेक प्रा. लि., निंबस पाइप्स लिमिटेड, मोहित पॉलिटेक प्रा. लिमिटेड, वेदांता पॉलीमर्स प्रा. लिमिटेड, रूंगटा इरीगेशन लिमिटेड, श्री भंडारी प्लास्टिक प्रा. लिमिटेडस भारत ड्रिप इरीगेशन एंड एग्रोस आर.एम. ड्रिप एंड स्प्रिंकलर सिस्टम लिमिटेड, समय इरीगेशन प्रा. लि. दिनेश इरीगेशन प्रा. लि और इरिलिंक ड्रिप इरीगेशन इंडस्ट्रीज को गलत तरीके से कार्यादेश जारी किए गए.
किसान सभा ने बताया है कि तत्कालीन कृषि निदेशक श्री ताराचंद जी द्वारा दिनांक 18.03.2024 को स्पष्ट आदेश दिया गया था कि जाँच रिपोर्ट प्राप्त होने तक इनके कार्यादेश शिथिल रखे जाएं और हजारीबाग उपायुक्त की रिपोर्ट पर एफआईआर दर्ज की जाए, परन्तु आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई.
सभा की मांग है कि इन सभी 14 कंपनियों के भुगतान और कार्यादेश पर रोक लगाने का निर्देश झारखण्ड सरकार को दिया जाए. साथ ही एक एसआईटी गठित कर उच्च स्तरीय जाँच कराई जाए. और भारत सरकार की योजना (PMKSY) के तहत दिए गए अनुदान की वसूली पर विचार किया जाए.
