रांचीः झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड सामान्य स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (सीजीएल) 2023 के रिजल्ट प्रकाशन को लेकर हाइकोर्ट के आदेश पर खुशी जाहिर करते हुए कहा है कि सरकार युवाओं के साथ हर कदम पर पूरी मजबूती के साथ खड़ी है. तमाम चुनौतियों के बीच युवाओं का भविष्य संवारने का प्रयास निरंतर जारी है.
गुरुवार को सफल अभ्यर्थियों का एक हुजूम आभार व्यक्त करने सीएम हाउस पहुंचा था. हेमंत सोरेन खुलकर युवाओं से मिले. उनकी खुशी में शामिल हुए और अपनी बातें कही.
गुरुवार को ही हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया के अपने अकाउंट पर सीजीएल के सफल अभ्यर्थियों के साथ मुलाकातों की तस्वीरें साझा करते हुए एक पोस्ट भी किया है- आपके चेहरे की खुशी आपके संघर्ष, आपके समर्पण का गवाह है. षड्यंत्र थोड़े समय के लिए सत्य को धुंधला जरूर कर सकता है पर उसे कभी भी मिटा नहीं सकता है.
सारी अड़चनें दूर
हेमंत सोरेन ने कहा, जेएसएससी की संयुक्त स्नातक स्तरीय प्रतियोगिता परीक्षा के रिजल्ट और नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ी सारी अड़चनें अब दूर हो चुकी है. हालांकि, इसमें थोड़ा विलंब हुआ, नहीं तो राज्य सरकार की पहली वर्षगांठ पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में आपके हाथों में भी नियुक्ति पत्र देने की खुशियां हम सभी मनाते
मुख्यमंत्री ने कहा “इस राज्य में कुछ ऐसे विरोधी तत्व है जो हर प्रतियोगिता परीक्षाओं को बाधित करने की साजिश रचते रहते हैं. जेएसएससी संयुक्त स्नातक स्तरीय प्रतियोगिता परीक्षा को लेकर भी उन्होंने षड्यंत्र रचने का प्रयास किया. मामला उच्च न्यायालय तक पहुंचा. लेकिन, हमारी सरकार ने पूरी निष्पक्षता के साथ इसकी जांच कराई. जिन्होंने इस प्रतियोगिता परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता को दागदार बनाने की साजिश रची, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई हुई. झारखंड उच्च न्यायालय ने भी इसे समझा और आपके ईमानदार प्रयास और भावनाओं को सम्मान देते हुए आपको न्याय दिया.”

सीएम हाउस में हेमंत सोरेन के साथ उनकी पत्नी और जेएमएम की विधायक कल्पना सोरेन भी मौजूद थीं. उन्होंने बी सफल अभ्यर्थियों से मुलाकात की. कल्पना सोरेन ने कहा है, यह जीत झारखण्ड के करोड़ों युवाओं की जीत है. यह जीत राज्य के हर एक युवा की षड्यंत्र के खिलाफ संघर्ष की जीत है।
हाइकोर्ट का आदेश
गौरतलब है कि बुधवार को झारखंड हाइकोर्ट ने सीजीएल में पेपर लीक मामले की सीबीआइ जांच की माग वाली पीआईएल को निष्पदित करते हुए झारखंड कर्मचारी चयन आयोग को शीघ्र रिजल्ट निकालने को कहा है.
इसके साथ ही कोर्ट ने पेपर लीक मामले की जांच कर रही एसआइटी को छह महीने में अपना अनुसंधान पूरा करने को कहा है. यह फैसला चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने सुनाया है.
इससे पहले तीन नवंबर को सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रखा गया था. अदालत ने बुधवार को फैसला सुनाते हुए जेएसएससी को परीक्षा का रिजल्ट जारी करने का निर्देश दिया है.
इसमें एक महतत्वपूर्ण बात यह है कि नेपाल गए दस अभ्यर्थियों के रिजल्ट पर फिलहाल रोक रहेगी. कोर्ट ने यह भी कहा है कि भविष्य में अगर एसआईटी जांच में किसी अभ्यर्थी की सफलता मिलती है, तो उसकी नियुक्ति प्रभावित होगी.
ध्यान रहे कि राज्य सरकार की जांच एजेंसी सीआइडी पेपर लीक मामले की जांच कर रही है. इसके लिए एक एसआइटी बैठायी गई है. जबकि अलग- अलग छात्र संगठनों के साथ विपक्षी दलों द्वारा सीजीएल पेपर लीक की लंबे समय से सीबीआइ जांच की मांग की जाती रही है. वहीं राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि सीजीएल परीक्षा में पेपर लीक के कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं. गेस प्रश्न को प्रार्थियों द्वारा पेपर लीक का नाम देकर अभ्यर्थियों को गुमराह किया जा रहा है.
राज्यभर के 823 परीक्षा केंद्रों पर करीब दो हजार से अधिक पदों पर नियुक्ति के लिए जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा 21 और 22 सितंबर 2024 को आयोजित हुई थी.
इस परीक्षा में 3 लाख 4 हजार 769 अभ्यर्थी शामिल हुए थे. आयोग ने इस परीक्षा के आधार पर 5 दिसंबर 2024 को 2,145 अभ्यर्थियों को शॉर्टलिस्ट किया था, लेकिन मांमला कोर्ट में जाने के बाद रिजल्ट और नियुक्तियां लटकी पड़ी थी.
सीजीएल कथित पेपर लीक को लेकर विपक्ष परीक्षाओं में पारदर्शिता को लेकर हेमंत सोरेन सरकार की आलोचनाएं करता रहा है. बुधवार को कोर्ट का फैसला आने के बाद से ही सरकार के मंत्री , सत्तारूढ़ दलों के नेता इन बातों पर जोर देते रहे हैं कि सत्य की जीत हुई है.
