गढ़वाः झारखंड के गढ़वा जिले में खरौंधी कस्तूरबा विद्यालय की पूर्णकालिक टीचर के साथ वार्डन और रसोईया को कार्यमुक्त कर दिया गया है. इसके साथ ही सेवा से उनकी बर्खास्तगी की कार्रवाई शुरू कर दी गई है.
गढ़वा के ज़िलाधिकारी पशुपति नाथ मिश्रा ने बताया है कि प्रथम दृष्टया लापरवाही प्रमाणित होने पर वार्डन, पूर्णकालिक शिक्षिका एवं रसोईया को कार्यमुक्त कर बर्खास्तगी की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है. साथ ही 24 घंटे में प्रतिवेदन सौंपने के निर्देश के साथ संयुक्त जांच दल का गठन किया गया है.
उपायुक्त ने शनिवार को स्कूल का जायजा लिया और घटना की जानकारी ली. इसके बाद ने अस्पताल गए. वहां उन्होंने भर्ती स्कूल की छात्राओं से मुलाकात की और चिकित्सकों को समुचित इलाज के लिए आवश्यक निर्देश दिए.
उन्होंने बताया है कि सभी छात्राएं सुरक्षित हैं और उनकी सेहत में सुधार जारी है.
फूड पॉइज़निंग की शिकार कई छात्राओं की तबीयत में सुधार के बाद उन्हें अस्पताल से मुक्त भी कर दिया गया है.
100 लड़कियां बीमार पड़ीं
शुक्रवार को फूड पॉइज़निंग की शिकार कस्तूरबा की कम से कम 100 छात्राओं की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
उपायुक्त ने कहा, “शुक्रवार की रात जानकारी मिली थी कि बड़ी संख्या में छात्राएं फूड पॉइज़निंग से अस्वस्थ हो गई हैं. फौरन सिविल सर्जन को मुकम्मल इलाज के निर्देश दिए. फिलहाल सभी छात्राएं ठीक हैं. “
वहीं, कई अभिभावकों का कहना है कि इलाक़े में एहतियातन मुहर्रम की वजह से बिजली आपूर्ति रोक दी गई थी. ताजिए में तार लगने से करंट की घटनाओं को देखते हुए इलाक़े में ऐसा किया गया था.
अभिभावकों का आरोप है कि बिजली आपूर्ति न होने के कारण हॉस्टल में पानी की सुविधा भी ठप हो गई, ऐसे में छात्राओं को हॉस्टल की छत पर लगी प्लास्टिक की टंकी का बेहद गर्म पानी पीना पड़ा.
उन्होंने कहा, “शुक्रवार की रात जानकारी मिली थी कि बड़ी संख्या में छात्राएं फूड पॉइज़निंग से अस्वस्थ हो गई हैं. मैंने फौरन सिविल सर्जन को मुकम्मल इलाज के निर्देश दिए..”
वहीं, अभिभावकों का कहना है कि इलाक़े में एहतियातन मुहर्रम की वजह से बिजली आपूर्ति रोक दी गई थी. ताजिए में तार लगने से करंट की घटनाओं को देखते हुए इलाक़े में ऐसा किया गया था.
अभिभावकों का आरोप है कि बिजली आपूर्ति न होने के कारण हॉस्टल में पानी की सुविधा भी ठप हो गई, ऐसे में छात्राओं को हॉस्टल की छत पर लगी प्लास्टिक की टंकी का बेहद गर्म पानी पीना पड़ा. उसी पानी से भोजन पकाया गया. इसके बाद छात्राओं की तबायत बिगड़ने लगी.
शाम सात बजे बच्चियों के बीमार होने की जानकारी मिलने के बाद वे कई अभिभावक स्कूल पहुंचे, लेकिन उन्हें मिलने नहीं दिया गया. इसके बाद पुलिस ने हस्तक्षेप कर स्कूल का गेट खुलवाया. आननन-फानन में बीमार छात्राओं को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया.
