रांचीः झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि मनरेगा की आत्मा से छेड़छाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा.
मंगलवार को जाने-माने अर्थशास्त्री और मनरेगा में पारदर्शिता तथा योजनाओं के सही क्रियान्वयन, मजदूरों के हक अधिकार को लेकर अभियान चलाने वाले ज्यां द्रेज़ और नरेगा वॉच के जेम्स हेरेंज ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर मनरेगा की जगह जी राम जी अधिनयिम के बारे में जानकारी दी. साथ ही चिंता जाहिर किया कि इस नए अधिनियम से मजदूरों का हित नहीं होगा.
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के अपने अकाउंट एक्स पर इस मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए कहा है, “प्रख्यात अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज़े से बातचीत में मैंने यह स्पष्ट किया कि केंद्र द्वारा मनरेगा की योजना/ढांचे में बदलाव ग्रामीण गरीबों के अधिकारों पर सीधा हमला है. मजदूरी, काम की गारंटी और राज्यों के अधिकारों से समझौता नहीं होगा.”
गौरतलब है कि झारखंड में सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस ने मनरेगा के बदले केंद्र सरकार द्वारा पारित जी राम जी अधिनियम के विरोध में आंदलन का रुख अख्तियार कर लिया है. उधर बीजेपी सत्तारूढ़ दलों पर पलटवार करती रही है.
राज्य में अलग- अलग जन संगठनों के बीच से भी जी राम जी को लेकर प्रतिक्रियाओं और विरोध के स्वर उठते रहे हैं.
दो फरवरी को रांची में मजदूरों का जुटान
मंगलवार को ही झारखंड नरेगा वॉच ने रांची में एक प्रेस कांफ्रेस कर इस नए कानून का विरोध किया है. नरेगा वॉच के संयोजक जेम्स हेरेंज ने बताया है कि दो फरवरी को नरेगा दिवस के अवसर पर जी राम जी बिल के खिलाफ रांची में करीब 5 हजार मजदूरों का जुटान होगा.
संस्था ने मनरेगा और वीबी जी राम जी कानून का तुलनात्मक अध्ययन कर बताया है कि कैसे यह कानून मजदूर हित के खिलाफ है.
हेरेंज ने इसे देश के 26 करोड़ मजदूरों को सीधे प्रभावित करने वाला बताया गया है. नरेगा वॉच का दावा है कि इस नए कानून से ग्रामीण अर्थव्यवस्था, ग्रामीण संरचना और स्थानीय निकाय प्रभावित होंगे.
जेम्स हेरेंज के मुताबिक श्रम बजट के स्थान पर नॉर्मेटिव एलोकेशन, मजदूरी दर का केंद्रीकरण और 60 दिनों का अनिवार्य कार्यस्थगन झारखंड जैसे राज्यों के लिए चिंता का विषय है. इससे भूमिहीन मजदूरों पर संकट बढ़ने, पलायन और भुखमरी का खतरा बढ़ने की संभावना बढ़ गयी है.
इसके अलावा बायोमेट्रिक अटेंडेंस और 40 प्रतिशत वित्तीय भार की वजह से झारखंड जैसे राज्य पर करीब 2000 करोड़ का वित्तीय बोझ बढ़ेगा.
