रांचीः शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की प्रतिक्रिया सामने आई है.
उन्होंने कहा है, ‘उम्मीद की एक और किरण सलाखों के पीछे.’
सोशल मीडिया के अपने अकाउंट एक्स पर हेमंत सोरेन ने कहा है, “जल, जंगल, जमीन भाषा, संस्कृति अधिकार की रक्षा एवं देश के समर्पित एक और मजबूत आवाज को गुमनाम बनाने के लिए किए जा रहे षड़यंत्रों पर पूरे देश की नजर है.
गौरतलब है कि लेह में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को उनके गांव उलेटोक्पो से शुक्रवार को गिरफ़्तार कर लिया गया है.
पुलिस का आरोप है कि वांगचुक ने लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने और पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर अपनी भूख हड़ताल के दौरान दिए बयानों से भीड़ को भड़काया.
वांगचुक लद्दाख ने लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस (KDA) के साथ मिलकर यह प्रदर्शन शुरू किया था. भूख हड़ताल 10 सितंबर 2025 को शुरू हुई थी.
उनकी भूख हड़ताल के दौरान लेह में आंदोलन हिंसक हो गया जिसमें 4 लोगों की मौत हुई और तक़रीबन 50 लोग घायल हुए.
बुधवार को ही गृह मंत्रालय ने एक बयान जारी किया था. इसमें वांगचुक को भड़काऊ भाषणों के लिए जिम्मेदार ठहराया.
हालांकि गृह मंत्रालय द्वारा उन्हें जिम्मेदार ठहराए जाने पर सोनम ने कहा था कि मुझे ‘बलि का बकरा’ बनाया जा रहा है.
वांगचुक ने कहा था कि ये कहना कि यह (हिंसा) मेरे द्वारा भड़काई गई थी, समस्या के मूल से निपटने के बजाय बलि का बकरा ढूंढ़ने जैसा है, और इससे कोई हल नहीं निकलेगा.
बीते साल (2024) मार्च में भी उन्होंने लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और इसे छठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए 21 दिनों तक भूख हड़ताल की थी.
वहीं अक्तूबर 2024 में ही इसी मांग को लेकर उन्होंने लद्दाख से दिल्ली तक पैदल मार्च निकाला था. हालांकि दिल्ली पुलिस ने सिंघु बॉर्डर से उन्हें हिरासत में ले लिया था.
गौरतलब है कि साल 2019 में केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 को ख़त्म करके जम्मू-कश्मीर राज्य को दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों.. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया था.
