रांचीः रांची के ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मंदिर में गुरुवार को रथयात्रा महापर्व के अवसर पर भक्ति और आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा. सुबह से ही भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं. शाम को भगवान भव्य रथ पर सवार होकर मौसीबाड़ी के लिए प्रस्थान किए, तो भक्त अपने प्रभु को निहारते रहे. भक्तों की भीड़ के बीच से जय जगन्नाथ का जयघोष गुंजायमान होता रहा.
ऐतिहासिक रथ यात्रा के साक्षी राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय समेत कई गणमान्य बने.
सुबह में पट खुलते ही
इससे पहले प्रातः 5 बजे मंदिर के पट खुलते ही भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की कतार लगने लगी.
दूर-दराज से आए भक्त सुबह से ही लंबी कतारों में खड़े होकर भगवान के दर्शन का इंतजार कर रहे थे. इस दौरान पूरे मंदिर परिसर में ‘जय जगन्नाथ’ के जयघोष और भक्ति गीतों की गूंज सुनाई देती रही.
वैदिक मंत्रोच्चार और शंखध्वनि के बीच, जब मंदिर के गर्भगृह के कपाट खुले, तो वातावरण में एक दिव्य ऊर्जा का संचार हो गया.
विष्णु सहस्त्रनाम के पावन पाठ के स्वर भक्तों के मानस पटल पर उमड़ते-घुमड़ते रहे. राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी इस अनुष्ठान में पूर्ण निष्ठा के साथ भाग लिया.
दोपहर 2 बजे के बाद दर्शन बंद कर दिए गए.

भव्य रथ यात्रा, और रस्सी खींचने की लालसा
शाम 5 बजे भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को भव्य और सुंदर रथ पर सवार किया गया. फिर विधि-विधान के साथ अनुष्ठान हुआ. प्रभु मौसीबाड़ी के लिए प्रस्थान कर गए. हजारों श्रद्धालु रथ की रस्सी खींचने की लालसा लिए ज जगन्नाथ के उदघोष करते रहे. बड़ी तादाद में महिलाएं भी रथ यात्रा में शामिल हुईं. सुरक्षा के चाक-चौबंद व्यवस्था के बीच रथ- धीरे-धीर आगे बढ़ता रहा.
शाम 6:46 से 7 बजे के बीच विग्रहों का प्रवेश कराया जा रहा है. इसके बाद रात 8 बजे 108 दीपों से भगवान की मंगल आरती होगी और शयन आरती के साथ दिनभर के धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे.
सीएम ने पूजा अर्चना के साथ कहा
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जगन्नाथ मंदिर में पूजा- अर्चना के बाद अपने संदेश में कहा है, “आज रांची की ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ रथ यात्रा में शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. महाप्रभु श्री जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा के दर्शन कर राज्य की सुख, शांति, समृद्धि और सभी के मंगल की कामना की. यह पावन रथ यात्रा हमारी आस्था, संस्कृति, समरसता और सामाजिक एकता का जीवंत प्रतीक है. महाप्रभु श्री जगन्नाथ की कृपा से झारखंड निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर रहे और हर घर में सुख-समृद्धि का वास हो.”

तोरणद्वार निर्माण की घोषणा
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि जगन्नाथपुर मंदिर की भव्यता को और बड़ी पहचान दिलायी जायेगी. इस ऐतिहासिक धार्मिक स्थल को पर्यटन के मानचित्र पर और मजबूती से स्थापित किया जाएगा.
मुख्यमंत्री ने कहा कि रांची के धुर्वा स्थित जगन्नाथ मंदिर की दूर से ही पहचान हो, इसके लिए राज्य सरकार द्वारा मंदिर को जोड़ने वाली सड़क पर भव्य तोरणद्वार का निर्माण कराया जाएगा.
उन्होंने कहा कि रथयात्रा महोत्सव का पूरे साल श्रद्धालुओं द्वारा इंतजार किया जाता है. यहां श्रद्धालुओं की उपस्थिति जगन्नाथपुर मंदिर की दिव्यता, भव्यता और आकर्षण को स्पष्ट करता है. आने वाले समय में यह रथयात्रा मेला को और सफल तथा प्रभावी बनाया जाएगा.
मौसीबाड़ी का प्रवास
पौराणिक कथाओं और लोक-विश्वास के अनुसार, भगवान जगन्नाथ हर वर्ष अपनी मौसी के घर यानी मौसीबाड़ी जाते हैं. यह प्रवास केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और सांस्कृतिक, धार्मिक परंपराओं से भी ओतप्रोत है माना जाता है. यह भी धारणा रही है कि प्रभु जब मौसीबाड़ी जाते हैं, तो वे आम भक्तों के और अधिक करीब हो जाते हैं. नौ दिनों तक भगवान अपनी मौसी के घर में विभिन्न प्रकार के भोग-प्रसाद ग्रहण करेंगे और भक्तों को दर्शन देंगे.
संदेश-समानता का प्रतीक
रथ यात्रा का जो मूल संदेश हैं वो है समानता. जब ईश्वर स्वयं सड़क उतर जाते हैं तो समाज के सभी भेदभाव चाहे जाति के हों, वर्ग के हो या उंच-नीच के सब दूर हो जाते हैं.
साल में एक बार भगवान मंदिर से बाहर निकलकर आम लोगों को दर्शन देते हैं. मान्यता है कि जो भी रथ की रस्सी खींचता है या रथ के दर्शन करता है उसे मोक्ष मिलता है.
