रांचीः नक्सली-उग्रवादी गतिविधियों और हिंसक घटनाओं के खिलाफ जारी अभियान के तहत सुरक्षा बलों ने साढ़े नौ महीने में 29 नक्सलियों और उग्रवादियों को मुठभेड़ में मार गिराया है. इनमें कई नक्सली इनामी थे और संगठन में कुख्यात होने के साथ बड़े ओहदे पर काबिज.
झारखंड पुलिस द्वारा जारी आंकड़े के मुताबिक 15 सितंबर की तारीख तक राज्य में भाकपा- माओवादी के 21, टीएसपीसी के 2, जेजेएमपी के 5 एवं पीएलएफआई के एक नक्सली को मुठभेड़ में मारा गया है.
मारे गए नक्सलियों में 11 इनामी चेहरे थे, जिन पर सरकार ने कुल 3.15 करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया था. इनमें दो सेंट्रल कमेटी मेंबर, प्रयाग मांझी और सहदेव सोरेन, भी शामिल हैं.
जाहिर तौर पर इनका मारा जाना नक्सली संगठनों के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है. बता दें कि केंद्र सरकार ने मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य रखा है.
झारखंड पुलिस, जगुआर और सीआरपीएफ की संयुक्त कार्रवाई में हजारीबाग में सुरक्षा बलों को माओवादियों के खिलाफ चलाए गए अभियान में 15 सितंबर को एक बडी सफलता अहम सफलता मिली है. जिले के गोरहर थाना क्षेत्र के पातीतारी में माओवादियों के साथ मुठभेड़ में पुलिस ने एक करोड़ रुपये का इनामी भाकपा (माओवादी) के टॉप, केंद्रीय कमेटी सदस्य सहदेव सोरेन उर्फ कमलेश उर्फ अमलेश के साथ और दो इनामी नक्सलियों को मार गिराया है.

सहदेव गंझू के साथ मारे गए दूसरे माओवादी का नाम रघुनाथ हेंब्रम उर्फ निर्भय उर्फ बिरसेन उर्फ चंचल शामिल है. रघुनाथ पर 25 लाख रुपये का इनाम था. संगठन में उसका ओहदा सैक सदस्य का था. इसी मुठभेड़ में 10 लाख का इनामी बिरसेन गंझू उर्फ रामखेलावन गंझू उर्फ छोटा भी मारा गया है. इस ऑपरेशन को नाम दिया गया ऑपरेशन ‘चूना पत्थर’.
सुरक्षा बलों के द्वारा चलाये जा रहे नक्सलियों के खिलाफ अभियान और मुठभेड़ में इस साल के 15 सितंबर तक 54 हथियार बरामद किए गए हैं. इनमें एके 47, इंसास जैसे हथियार भी शामिल हैं. इन अभियान में अच्छे संकेत ये हैं कि पुलिस का इंटेलिजेंस सिस्टम परफेक्ट साबित हो रहा है.’
पिछले 15 सितंबर को हजारीबाग में पुलिस को मिली सफलता के बाद राज्य के पुलिस महानिदेशक अनुराग गुप्ता और सीआरपीएफ के आईजी साकेत कुमार सिंह भी वहां पहुंचे थे. तब मीडिया से बातचीत में अनुराग गुप्ता ने कहा था कि नक्सलवाद झारखंड में खिरी सांसे गिन रहा है. पुलिस को लगातार सफलता मिल रही है. जो बचे- खुचे हैं वे हथियार डालकर मुख्य धारा में लौटें, वर्ना कार्रवाई जारी रहेगी.

सीआरपीएफ के आइजी साकेत सिंह का भी कहना है कि लातेहार, पलामू में नक्सलियों और उग्रवादियों की जड़े सुरक्षा बलों ने उखाड़ दी है. दूसरे इलाके में भी नक्सलियों का सफाया अब आखिरी दौर में है. इस साल के अंत तक झारखंड नक्सलियों- उग्रवादियों के खौफ से लगभग बाहर निकल सकता है.
गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से दी गई ताजा जानकारी के मुताबिक झारखंड में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या अब मात्र 6 हैं, जिसमें पश्चिमी सिंहभूम एक मात्र ऐसा जिला है. जो अति प्रभावित की श्रेणी में है.
पुलिस के मुताबिक माओवादियों का लोकल सपोर्ट सिस्टम लगभग खत्म कर दिया गया है. वे कैडर में नए लोग भर्ती नहीं कर पा रहे हैं. हथियारों की आपूर्ति नहीं हो पा रही है. गांवों में अब उन्हें संरक्षण नहीं दिया जा रहा. उनके बंकर बड़े पैमाने पर ध्वस्त किए गए हैं. पलामू में बूढ़ा पहाड़ खाली करा दिया गया है.
एक पुलिस अधिकारी का कहना है कि जिन माओवादियों ने सरेंडर किया है, उन्होंने हमें काफी जानकारी दी है. इससे अभियान और उनके पैटर्न समझने में काफी मदद मिली है.
