रांचीः लोकसभा में महिला आरक्षण क़ानून में संशोधन बिल गिर जाने के विरोध में झारखंड प्रदेश बीजेपी ने शनिवार को रांची में आक्रोश मार्च निकाला. इस आक्रोश मार्च में राज्य भर से पार्टी के कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए. इनमें महिलाओं की बड़ी तादाद थी.
मोराबादी मैदान में सभा के बाद हाथों में कांग्रेस और झामुमो पर महिला विरोधी होने के आरोपों की तख्तियां लिए हजारों महिलाएं चिलचिलाती धूप में रांची के मोरहाबादी मैदान से अल्बर्ट एक्का चौक तक जुलूस के शक्ल में पहुंचीं.
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदितय साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी, संजय सेठ समेत सभी प्रमुख नेता इसमें मौजूद रहे. हालांकि मंच पर राज्य भर से आईं बीजेपी की महिला नेताओं को ही स्थान दिया गया.
भाजपा की महिला विधायक पूर्णिमा दास साहू, नीरा देवी, मंजु देवी, पूर्व सांसद गीता कोड़ा समेत कई प्रमुख नेता भी मार्च में कांग्रेस के खिलाफ में नारे लगाती रहीं.
छुटकी महतो, जमुना टुडु भी आईं
आक्रोश सभा में पद्मश्री छुटकी महतो और जमुना टुडू ने भी मंच से महिलाओं को अधिकार नहीं देने के सवाल पर कांग्रेस को घेरा. उन्होंने कहा कि कांग्रेस की नीति और नीयत महिला विरोधी है.
प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कहा कि गांव-घर में जब कांग्रेस के नेता जाएंगे, तो महिलाएं उनसे अपने साथ हुए धोखे पर जरूर सवाल पूछेंगी.
उन्होंने कहा कि केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार महिलाओं को विधायिका में 50 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए तैयार थी, लेकिन कांग्रेस को देश में महिलाओं को मजबूत होते देखना अच्छा नहीं लगा.
उन्होंने कहा कि रांची में निकली यह आक्रोश रैली गांव तक जाएगी। मंडल स्तर पर भाजपा की महिला कार्यकर्ता कांग्रेस को बेनकाब करेंगी. रैली में शामिल होने आई महिलाओं ने भी कांग्रेस पर सवाल उठाए.
भाजपा नेताओं ने कहा है कि अन्याय, असुरक्षा और अपमान के खिलाफ यह सिर्फ एक मार्च नहीं, बल्कि बदलाव की हुंकार है.
केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा कि मातृशक्ति के साथ कांग्रेस सहित इंडी गठबंधन ने महापाप किया है। रांची की सड़कों पर महिलाओं की आज की भीड़ देखकर सभी विपक्षी दलों की चूलें हिलनी तय है. 16-17 अप्रैल की तिथि देश के इतिहास में ऐतिहासिक हो जाती, अगर 33% आरक्षण वाला बिल पास हो गया होता और महिलाओं को उनका अधिकार मिल गया होता.
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि कांग्रेस और झामुमो सहित इंडी गठबंधन ने इस विधेयक पर साथ नहीं दिया और इसके विरोध में वोट कर दिया. पीएम मोदी महिलाओं को जो हक देने वाले थे, महिलाएं उससे वंचित रह गई. झारखंड में भी महिलाओं में विपक्ष के प्रति इस बिल को गिराने से भारी आक्रोश है.
