रांची. झारखंड हाइकोर्ट ने अधिवक्ता महेश तिवारी के खिलाफ चल रहे आपराधिक अवमानना मामले को समाप्त कर दिया है.
कोर्ट ने वकील की बिना शर्त माफी को स्वीकार करते हुए भविष्य में ऐसी हरकत न करने की चेतावनी के साथ मामले को स्थगित कर दिया. और अधिवक्ता महेश तिवारी को आगे सतर्क रहने की सलाह दी गई है.
यह मामला पिछले साल अक्टूबर महीने का है. झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस राजेश कुमार की अदालत में एक मामले की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता महेश तिवारी ने गुस्से में गरिमा के खिलाफ टिप्पणियां की थी.
वकील ने जज से कहा था, “हद में रहें… किसी को अपमानित न करें… हद पार न करें” (Don’t cross the limit)। इस दौरान उन्होंने न्यायाधीश पर कथित तौर पर ‘अपमानजनक’ टिप्पणी करने का आरोप लगाया, जिससे कोर्ट स्तब्ध हो गया.
सुनवाई और वकील के इस व्यवहार का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. बाद में हाइकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की.
इसके बाद मुख्य न्यायाधीश तारलोक सिंह चौहान की अध्यक्षता वाली पांच जजों की पीठ (जिसमें जस्टिस सुझीत नारायण प्रसाद, रोंगोन मुखोपाध्याय, आनंद सेन और राजेश शंकर शामिल थे) ने महेश तिवारी को नोटिस जारी किया और जवाब मांगा.
सुप्रीम कोर्ट में अपील
अवमानना नोटिस के खिलाफ महेश तिवारी ने जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने उनकी याचिका पर सख्त रुख अपनाया.
सीजेआई ने कहा, “वह सिर्फ सुप्रीम कोर्ट से आदेश लेकर दिखाना चाहते हैं कि ‘क्या बिगाड़ लिया मेरा’.” कोर्ट ने हस्तक्षेप से इनकार कर दिया और सलाह दी कि वे झारखंड हाई कोर्ट के सामने ही बिना शर्त माफी मांगें.
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट से माफी पर “सहानुभूतिपूर्ण” विचार करने का अनुरोध भी किया.
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद महेश तिवारी ने झारखंड हाई कोर्ट की पांच जजों की पीठ के सामने हलफनामा दाखिल कर बिना शर्त माफी मांगी.
उन्होंने अपने व्यवहार के लिए खेद जताया और भविष्य में कोर्ट की गरिमा बनाए रखने का वादा किया. कोर्ट ने माफी को स्वीकार करते हुए मामले को समाप्त कर दिया.
