बोकारो स्टील प्लांट में नियोजन की मांग को लेकर जारी आंदोलन और गेटों पर गतिरोध के बीच झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर गठित विशेष पीठ ने रविवार को दोपहर सुनवाई की. अदालत ने प्लांट में कर्मचारियों की आवाजाही बाधित नहीं हो, और कानून- व्यवस्था बहाल रहे इसे लेकर आवश्यक निर्देश दिए हैं.
बोकारो स्टील प्लांट के सभी 11 गेटों को बंद कर कर्मचारियों और आवश्यक सामग्रियों की आवाजाही बाधित किए जाने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने रविवार को अवकाश के दौरान सुनवाई की.
दरअसल, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान बोकारो के उपायुक्त अजय नाथ झा ने अदालत को आश्वस्त किया कि प्लांट के सभी गेट खोल दिए गए हैं और कर्मचारियों की आवाजाही सामान्य हो गई है.
उन्होंने बताया कि भविष्य में भी प्लांट के संचालन और कर्मचारियों के आने-जाने में किसी तरह की बाधा नहीं आने दी जाएगी.
शपथ पत्र देने को कहा
न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने उपायुक्त के आश्वासन पर फिलहाल गृह सचिव को तलब नहीं किया. अदालत ने बोकारो के उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को अगली सुनवाई से पहले शपथ पत्र दाखिल कर अदालत में दिए गए आश्वासन की पुष्टि करने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर 2026 को होगी.
पूजा अवकाश में विशेष कोर्ट बैठी
गौरतलब है कि बीएसएल में गेट पर धरना- प्रदर्शन और गेट जाम कर दिए जाने की स्थिति में सेल की ओर से हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को पत्र भेजकर तत्काल हस्तक्षेप का अनुरोध किया गया था. इसमें बताया गया था कि बोकारो की विधायक श्वेता सिंह और विस्थापित अप्रेंटिस संघ (वीएएस) के आंदोलनकारियों ने प्लांट के गेटों पर अवरोध उत्पन्न कर दिया है. इससे कर्मचारियों, मेंटेनेंस स्टाफ, कच्चे माल और आवश्यक सामग्रियों की आवाजाही प्रभावित हो रही है.
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर विशेष पीठ गठित की गई और रविवार को दोपहर 2:15 बजे सुनवाई निर्धारित की गई. अदालत में सेल की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने वर्चुअल माध्यम से पक्ष रखा, जबकि अधिवक्ता बिभाष सिन्हा और ऋषव राज उपस्थित रहे. राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता जय प्रकाश ने पक्ष रखा.
3500 कर्मचारी प्लांट के अंदर फंसे थे
सेल की ओर से अदालत को बताया गया कि 16 अक्टूबर की सुबह से प्लांट के सभी गेटों पर अवरोध उत्पन्न कर दिया गया था. इसके कारण करीब 3500 कर्मचारी और श्रमिक प्लांट के अंदर फंस गए थे. उनकी शिफ्ट बदलना मुश्किल हो गया था. याचिका में दावा किया गया कि कर्मचारियों को भोजन, पानी और आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराने में भी परेशानी हो रही थी.
कंपनी ने अदालत को बताया कि बोकारो स्टील प्लांट एक सतत प्रक्रिया वाला औद्योगिक प्रतिष्ठान है, जहां ब्लास्ट फर्नेस, पिघले हुए लोहे, उच्च दबाव वाली पाइपलाइन और संवेदनशील गैस प्रणालियों का लगातार संचालन होता है. ऐसे में कर्मचारियों, रखरखाव दल और आवश्यक आपूर्ति की आवाजाही बाधित होने से गंभीर औद्योगिक दुर्घटना का खतरा पैदा हो सकता है.
सेल ने यह भी आशंका जताई कि यदि प्लांट को अचानक बंद करना पड़ा, तो करीब 12 हजार टन पिघला हुआ स्टील ब्लास्ट फर्नेस में जम सकता है. इससे संयंत्र को भारी आर्थिक नुकसान होने के साथ पर्यावरण और मानव जीवन के लिए भी खतरा उत्पन्न हो सकता है.
डीसी ने बताया, सभी गेट खुल गए हैं
सुनवाई के दौरान बोकारो के उपायुक्त अजय नाथ झा और पुलिस अधीक्षक नाथू सिंह मीणा वर्चुअल माध्यम से अदालत में उपस्थित हुए. उपायुक्त ने कहा कि जिला प्रशासन ने आंदोलनकारियों को समझाकर हटाने के लिए प्रभावी कदम उठाए हैं. मुख्य गेट नंबर एक खोल दिया गया और प्लांट के अंदर फंसे कर्मचारियों को बाहर निकलने दिया गया.
जब सेल की ओर से शेष 10 गेटों को भी खोलने की मांग की गई, तो उपायुक्त ने बताया कि सभी गेट खोल दिए गए हैं. इसके बाद अदालत के निर्देश पर सेल के अधिवक्ता ने कंपनी से जानकारी लेकर पुष्टि की कि शेष 10 गेट भी खुल गए हैं और कर्मचारियों तथा अधिकारियों की आवाजाही सामान्य रूप से शुरू हो गई है.
हालांकि, कंपनी की ओर से यह आशंका जताई गई कि प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की, तो भविष्य में फिर से गेट बंद किए जा सकते हैं. इस पर उपायुक्त ने अदालत को भरोसा दिलाया कि कर्मचारियों के ड्यूटी पर आने-जाने में किसी तरह की बाधा नहीं आने दी जाएगी और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे.
गृह सचिव को नहीं किया तलब
अदालत ने उपायुक्त से पूछा कि क्या आंदोलनकारियों के कारण स्थिति नियंत्रित करने में उन्हें किसी प्रकार की कठिनाई हो रही है. इस पर उपायुक्त ने कहा कि वह स्थिति को नियंत्रित करने में सक्षम हैं और किसी उच्च अधिकारी को बुलाने की आवश्यकता नहीं है.
उपायुक्त के आश्वासन पर भरोसा जताते हुए अदालत ने फिलहाल राज्य के गृह सचिव को तलब नहीं किया. अदालत ने यह भी कहा कि उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक अपने आश्वासन के अनुरूप शपथपत्र दाखिल करें, ताकि अगली सुनवाई में स्थिति की समीक्षा की जा सके. फिलहाल विधायक श्वेता सिंह और विस्थापित अप्रेंटिस संघ को नोटिस जारी नहीं किया गया है.
विस्थापितों की नियुक्ति का भी उल्लेख
सुनवाई के दौरान सेल की ओर से विस्थापितों की नियुक्ति से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के दो आदेशों का भी हवाला दिया गया. 5 मार्च 2008 के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि बोकारो स्टील प्लांट की स्थापना के लिए भूमि अधिग्रहण से प्रभावित 970 लोगों के नामों पर अन्य शर्तें समान होने पर नियुक्ति के लिए विचार किया जाए और उन्हें प्राथमिकता दी जाए. हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया था कि इससे नियुक्ति का स्वतः अधिकार नहीं मिलता.
