रांचीः मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय, झारखण्ड द्वारा केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखण्ड के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के पहले दिन छह सत्रों में चर्चा की गई.
मतदाता पंजीकरण एवं मतदाता सूची को लेकर नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (NUSRL), रांची में आयोजित इस सम्मेलन में आईआईएम रांची, NUSRL रांची एवं सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची नॉलेज पार्टनर हैं.
उद्घाटन सत्र में भारत निर्वाचन आयोग के प्रधान सचिव श्री अरविंद आनंद मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे.
मकसद व्यापक विमर्शः के रविकुमार
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने कहा कि “मतदाता पंजीकरण एवं मतदाता सूची” विषय पर आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्देश्य वर्तमान में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से आगे बढ़कर मतदाता पंजीकरण के विषय पर व्यापक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में विमर्श करना है. उन्होंने बताया कि सम्मेलन के लिए 800 से अधिक विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों से संपर्क किया गया, जिसके फलस्वरूप 230 सार (Abstracts) प्राप्त हुए. स्वतंत्र अकादमिक विशेषज्ञ समिति द्वारा इनमें से 80 सार को शॉर्टलिस्ट किया गया तथा अंततः 58 शोध-पत्रों का प्रकाशन एवं विचार-विमर्श के लिए चयन किया गया.
वैश्विक व्यवस्थाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विभिन्न देशों में सक्रिय, स्वचालित एवं हाइब्रिड मतदाता पंजीकरण प्रणालियां प्रचलित हैं तथा जनसंख्या डेटाबेस, सिविल रजिस्ट्री, बायोमेट्रिक्स एवं सतत अद्यतनीकरण जैसी व्यवस्थाओं का उपयोग बढ़ रहा है.
भारत में मजबूत संवैधानिक एवं कानूनी ढांचा, व्यापक क्षेत्रीय सत्यापन तथा राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी की व्यवस्था है। इसका मूल उद्देश्य ऐसी शुद्ध, समावेशी एवं पारदर्शी मतदाता सूची सुनिश्चित करना है, जिसमें प्रत्येक पात्र नागरिक शामिल हो और कोई अपात्र व्यक्ति सम्मिलित न रहे.

लोकतांत्रिक सहभागिता का प्रवेश द्वार
नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (NUSRL), रांची के कुलपति प्रो. (डॉ.) अशोक आर. पाटिल ने कहा कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक सहभागिता का प्रवेश द्वार है और विश्वसनीय चुनाव की शुरुआत शुद्ध, समावेशी एवं नियमित रूप से अद्यतन मतदाता सूची से होती है.
उन्होंने निर्वाचन प्रक्रिया की शुचिता और समावेशन के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में सुनिश्चित होना चाहिए, वहीं फर्जी, डुप्लीकेट अथवा अपात्र पंजीकरण को रोकना भी आवश्यक है.
जवाबदेही को प्राथमिकता मिलेः प्रो पाटिल
“Voter Registration and Voter Registers 2026” अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रो. पाटिल ने कहा कि मतदाता सूची प्रबंधन में शुद्धता, समावेशन, सुगमता, पारदर्शिता एवं जवाबदेही जैसे सिद्धांतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए होना चाहिए, लेकिन यह मानवीय विवेक एवं निर्णय का विकल्प नहीं बनना चाहिए. अंतिम लक्ष्य यह सुनिश्चित करना होना चाहिए कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रहे, कोई अपात्र व्यक्ति इसमें शामिल न हो तथा प्रत्येक नागरिक विश्वास एवं भरोसे के साथ निर्वाचन प्रक्रिया में भाग ले सके.
शुद्ध एवं समावेशी मतदाता सूची मजबूत लोकतंत्र की आधारशिला
सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची के प्राचार्य डॉ. फादर रॉबर्ट प्रदीप कुजूर ने कहा कि शुद्ध एवं समावेशी मतदाता सूची मजबूत लोकतंत्र की आधारशिला है. शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि कॉलेज एवं विश्वविद्यालय मतदाता जागरूकता, परिसर आधारित मतदाता पंजीकरण अभियान तथा नागरिक शिक्षा के माध्यम से लोकतंत्र को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं.
उन्होंने बढ़ते प्रवासन, शहरीकरण एवं तकनीकी बदलाव के बीच विशेष रूप से युवा मतदाताओं, प्रवासियों एवं वंचित समुदायों की निर्वाचन प्रक्रिया में भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया.
केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखण्ड के कुलपति प्रो. सारंग मेधेकर ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय, झारखण्ड के साथ विश्वविद्यालय की निकट साझेदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सहयोग अकादमिक शोध और निर्वाचन प्रबंधन के व्यावहारिक अनुभवों को प्रभावी रूप से एक मंच पर लाता है.
प्रो. मेधेकर ने अकादमिक जगत एवं निर्वाचन प्रशासन के बीच की दूरी को कम करने की पहल के लिए भारत निर्वाचन आयोग की सराहना की. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दो दिवसीय सम्मेलन में मतदाता पंजीकरण एवं मतदाता सूची प्रबंधन से जुड़े विषयों पर सार्थक विचार-विमर्श होगा और महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने आएंगे. उन्होंने सम्मेलन के आयोजन में प्रो. आलोक गुप्ता, डॉ. अपर्णा एवं केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखण्ड की टीम के योगदान की भी सराहना की.
