झारखंड में तृतीय प्रस्तुति कमेटी (टीपीसी) का सुप्रीमो बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता उत्तर प्रदेश प्रदेश के बनारस इलाके में पुलिस के साथ एक मुठभेड़ में मारा गया है.
झारखंड के चतरा जिले में सक्रिय प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन टीपीसी के सुप्रीमो ब्रजेश उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता पर झारखंड सरकार ने 25 लाख और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने पांच लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था.
वह झारखंड के चतरा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र के लट्टू सोहावन गांव का रहने वाला था। साथ ही वह सिमरिया के पूर्व विधायक गणेश गंझू का भाई था. बताया जा रहा है कि ढाई- तीन साल से वह अंडरग्राउंड की भूमिका में था.
जानकारी के मुताबिक रविवार तड़के वाराणसी के रामनगर थाना क्षेत्र के लंका मैदान में टेंगरा मोड़ के पास पुलिस के साथ उसकी यूपी एसटीए के साथ मुठभेड़ हुई. इस मुठभेड़ में एसटीएफ ने उसे मार गिराया.
एटीएस ने रोका तो कर दी फायरिंग
एटीएस के डिप्टी एसपी विपिन राय के अनुसार, टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि झारखंड का वांछित उग्रवादी कमांडर बृजेश गंझू मोटरसाइकिल से टेंगरा मोड़ होते हुए मुगलसराय की ओर जाने वाला है.
सूचना के आधार पर रविवार सुबह करीब पांच बजे एटीएस की टीम ने इलाके में घेराबंदी कर दी. इसी दौरान मोटरसाइकिल सवार एक संदिग्ध व्यक्ति वहां पहुंचा. टीम ने उसे रुकने का इशारा किया तो उसने कथित तौर पर पुलिसकर्मियों पर फायरिंग शुरू कर दी. जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया.
22 साल पहले संगठन खड़ा किया, कोयला क्षेत्र में दबदबा
बृजेश साल 2010 में लावालौंग पंचायत से निर्विरोध मुखिया चुना गया था ,लेकिन मुखिया बनने के बाद भी वह उग्रवादी गतिविधियों से जुड़ा ही रहा.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बृजेश गंझू ने साल-2004 में अपना संगठन खड़ा किया था. टीपीसी ने झारखंड के चतरा, रांची, रामगढ़, हजारीबाग, लातेहार और पलामू सहित बिहार के भी कुछ जिलों में अपनी गतिविधियां बढ़ा ली थीं. संगठन द्वारा अंजाम दी गई घटनाओं में कई जानें गई थीं.
बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह पर कारोबारियों, ट्रांसपोर्टरों और ठेकेदारों को डरा-धमकाकर वसूली करने का भी आरोप था। बताया जा रहा है कि आठ साल पहले उसके घर की कुर्की भी की गई थी. उसके खिलाफ चतरा जिले के अलग-अलग थानों में कम से कम 50 मामले दर्ज थे. लेवी वसूली और हत्या की कई खौफनाक घटनाओं में उसकी संलिप्तता रही है.
