केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रदान के इस्तीफे के कुछ देर बाद मोदी सरकार के मंत्री जेपी नड्डा और जितंद्र सिंह की कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रतिनिधियों के बीच एक और बैठक हुई. इस बैठक के बाद साझा प्रेस कांफ्रेंस में सीजेपी ने ऐलान किया कि सरकार ने उनकी सभी मांगें मान ली हैं और अब वो अपना आंदोलन वापस ले रहे हैं.
सीजेपी प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की हमारी मांग सुबह में मान ली गई है. अब अन्य मांगों को लेकर सरकार ने मंगलवार तक पूरे होने का भरोसा दिया है.
सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि हमारी दूसरी मांग थी कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर सिर्फ दिल्ली में ही नहीं बल्कि सभी भाजपा शासित और भाजपा सहयोगी राज्यों में, वापस ली जाएं. यह भी हमारी दूसरी मांग थी. सरकार ने वह मांग भी मान ली है.
कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में हुई बैठक में केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने किया, जबकि सीजेपी प्रतिनिधिमंडल में संगठन के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका शामिल हुए. यह बैठक करीब डेढ़ से दो घंटों तक चली.
कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन वापस लेने के बाद केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह ने कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका से हाथ मिलाया.
सरकार से बातचीत के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा, “हमने सरकारी डेलीगेशन के साथ तीन राउंड की बातचीत की. जंतर-मंतर पर हमारा प्रोटेस्ट, जो कई दिनों से चल रहा था, उसकी तीन मेन डिमांड थीं: धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, प्रोटेस्टर्स और ऑर्गेनाइजर्स के खिलाफ फाइल किए गए सभी लीगल केस, वो एफआईआर वापस ली जाएं और प्रदर्शनकारियों या संगठकों के खिलाफ भविष्य में कोई केस दर्ज नहीं किए जाएं.”
रांका ने कहा, ” हमारी तीसरी मांग थी कि नीट पेपर न होने के बाद जिन परिवारों ने अपनों को खो दिया, उन्हें 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए. अभी कुछ देर पहले ही धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया है. इसका मतलब है कि हमारी पहली डिमांड मान ली गई है.”
