रांची- झारखंड में बड़कागांव से पूर्व विधायक और कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव अंबा प्रसाद अपने पिता योगेंद्र साव को कांग्रेस से बाहर किए जाने की कार्रवाई से नाराज हैं. उन्होंने कहा है कि प्रदेश नेतृत्व ने एक वरिष्ठ कांग्रेसी के साथ गलत कार्रवाई की है. वेलोग आलाकमान से मिलकर पूर बात की जानकारी देंगे.
अंबा ने रविवार को रांची में एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा, “एनटीपीसी के खिलाफ उनका संघर्ष जारी रहेगा और यागेंद्र साव के खिलाफ कार्रवाई के विरोध में वे लोग आलाकमान तक पहुंचकर गुहार लगाएंगे.”
अंबा प्रसाद ने कांग्रेस के साथ गठबंधन के नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए. यह भी कहा कि पूर्व मंत्री योंगेंद्र साव को निष्कासित करने के पहले पार्टी ने शोकॉज तक नहीं किया गया. पार्टी ने उचित प्रक्रिया का पालन किए बगैर उन्हें निष्कासित किया है. जबकि पार्टी की ओर से प्रेस के सामने झूठा बयान दिया गया कि इस मामले को पार्टी फोरम में उठाना चाहिए था, जबकि वास्तव में उन्होंने पहले से ही पार्टी नेतृत्व को पूरी जानकारी दी थी.
अंबा ने दावा किया कि उनके परिवार और खासकर पिता को पार्टी का अनुशासन तोड़ने के लिए मजबूर किया गया. पिता योंगेंद्र साव को धमकियां भी दिए जाने की बात उन्होंने कही. उनके पिता के घर को जबरन तोड़ा गया.
उन्होंने सवाल उठाया कि विस्थापन और मुआवजा के विवाद को लेकर प्रदेश नेतृत्व ने जांच के लिए कमेटी बनाई गई तो उसकी रिपोर्ट कहां है और क्यों इसे सार्वजनिक नहीं किया गया? पार्टी और गठबंधन सरकार जनता से अलग नहीं है. जनता की समस्याओं की अनदेखी करना पार्टी के लिए नुकसानदेह है.
उन्होंने कहा कि एनटीपीसी के रवैये और जमीन अधिग्रहण की कार्रवाईयों के खिलाफ हमारी लड़ाई का परिणाम यह है कि वहां के लोगों को तीन से लेकर 25 लाख रुपये तक मुआवजा मिला है. रैयतों में हमारा परिवार भी शामिल है. रैयत हमेशा से हमारी लड़ाई में साथ रहे हैं. हम तो सरकार का आदेश मानते हुए कोल बेयरिंग एक्ट के तहत मुआवजा का विरोध कर रहे हैं. सरकार ने ही यह अधिसूचित किया है कि 2015 के बाद कोल बेयरिंग एक्ट के तहत मुआवजा मान्य नहीं होगा.
भाजपा के एक सांसद का नाम लिए बगैर उन्होंने कहा कि उनकी ओर से धमकी दी गई थी कि उनका राजनीतिक करियर खत्म कर दिया जाएगा.
