रांचीः झारखंड के चाईबासा सदर अस्पताल में थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को एचआइवी संक्रमित खून चढ़ाने के मामले में कड़ा रुख दिखाते हुए झारखंड हाईकोर्ट से सरकार से जवाब-तलब करते हुए जांच की प्रगति पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.
इसके साथ ही कोर्ट ने इस मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक रूप से कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि सिर्फ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कर देना पर्याप्त नहीं है.
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नौनिहालों को संक्रमित खून चढ़ाना बेहद गंभीर लापरवाही है, जिससे उनके जीवन पर सीधा खतरा उत्पन्न हो गया है. अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में दोषियों को जल्द से जल्द चिन्हित कर उन्हें न्याय के कटघरे में लाना जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो.
इस मामले की सुनवाई जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय की अदालत में हुई. सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और पाया कि मामले की गंभीरता के बावजूद जांच की प्रगति स्पष्ट नहीं है. इसके बाद कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह जांच से जुड़ी विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करे.
कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से दाखिल जवाब पर भी नाराजगी जताई. अदालत ने कहा कि सरकार का जवाब केवल प्राथमिकी दर्ज करने तक सीमित है, जबकि जांच की प्रगति के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई है. यह स्थिति न्यायिक प्रक्रिया के लिए संतोषजनक नहीं मानी जा सकती. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है.
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 21 अप्रैल की तिथि निर्धारित की है. इस दौरान राज्य सरकार को जांच की अद्यतन स्थिति के साथ विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी होगी.
याचिकाकर्ताओं की मांग
यह याचिका दीपिका हेंब्रम और अन्य की ओर से दायर की गई है. याचिका में मांग की गई है कि मामले में सिर्फ एफआईआर दर्ज करने के बजाय एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर निष्पक्ष जांच कराई जाए. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस मामले में लापरवाही की गहन जांच जरूरी है, ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सके.
इसी मामले में पिछली सुनवाई में हाइकोर्ट ने दोषियों के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था.
अदालत ने चाईबासा सदर थाना प्रभारी को आदेश दिया है कि यदि मामले में संज्ञेय अपराध बनता है, तो बिना देरी किए कार्रवाई शुरू करें.
गौरतलब है कि चाईबासा सदर अस्पताल में ब्लड ट्रांसफ्यूजन (रक्त चढ़ाने) के दौरान लापरवाही बरती गई थी. इस कारण थैलेसीमिया पीड़ित पांच बच्चे एचआईवी (HIV) पॉजिटिव के शिकार हो गए थे.
यह घटना सामने आने के बाद सरकार ने सदर अस्पताल के सिविस सार्जन, मैडिकल अफसर और एक टेक्नीशियन को निलंबत कर दिया था. साथ ही प्रभावित परिवारों को दो- दोल लाख रुपये मुआवजा की घोषणा की गई थी.
घटना की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की विशेष सचिव नेहा अरोड़ा की अगुवाई में एक छह सदस्यीय कमेटी से पूरे मामले की जांच कराई गई थी.
