असम विधानसभा चुनाव परिणाम पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की प्रतिक्रिया सामने आई है. उन्होंने कहा है कि बहुत ही सीमित समय और संसाधन में जो नतीजे आए हैं, वह पार्टी का हौसला बढ़ाने वाला है.
असम में जेएमएम ने 16 सीटों पर अकेल दम पर चुनाव लड़ा था. हेमंत सोरेन- कल्पना सोरेन की जोड़ी समेत पार्टी के सभी प्रमुख नेताओं ने वहां लगभग दस दिनों तक जोरदार प्रचार भी किया.
सोशल मीडिया के एक्स पर हेमंत सोरेन ने असम के लोगों से कहा है, इस संघर्ष में जिस तरह से आपने हमारा साथ दिया, वह न केवल सराहनीय है, बल्कि हमारे लिए अत्यंत हौसला बढ़ाने वाला भी है. आपका यह समर्थन हमारे लिए शक्ति, प्रेरणा और नई ऊर्जा का स्रोत है.
हेमंत सोरेन ने कहा कि असम में चुनाव लड़ने का फैसला झारखंड मुक्ति मोर्चा के लिए केवल राजनीतिक विस्तार नहीं था, बल्कि यह वहां के आदिवासी-दलित-अल्पसंख्यक समाज के हक, सम्मान और पहचान की लड़ाई को मजबूत आवाज देने का एक ठोस कदम भी था. राज्य में आदिवासियों की दयनीय स्थिति – एसटी का दर्जा नहीं मिलना, चाय बागान के मजदूरों को उचित मजदूरी का अभाव और जमीन के अधिकार से वंचित रहना – इन गंभीर मुद्दों ने इस संघर्ष की नींव रखी.
दो सीटों पर दूसरे नंबर पर
जेएमएम के केंद्रीय अध्यक्ष ने कहा है कि पहली ही कोशिश में दो सीटों पर दूसरे स्थान पर रहना, सात सीटों पर 15 हजार से अधिक मत प्राप्त करना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि पार्टी ने जनता के बीच अपनी पकड़ बनानी शुरू कर दी है. यह प्रदर्शन दर्शाता है कि यह केवल शुरुआत है और आने वाले समय में संगठन और भी मजबूत होकर उभरेगा. यह परिणाम एवं लोगों का भरोसा इस बात को और स्पष्ट करती है कि आदिवासी समाज के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाने की आवश्यकता है.
उन्होंने कहा है कि यह केवल एक चुनावी प्रयास नहीं, बल्कि अस्तित्व, पहचान और अधिकारों की लड़ाई है और आपके साथ, आपके विश्वास के साथ, यह संघर्ष निरंतर जारी रहेगा.
