रांचीः झारखंड के खूंटी जिला में पेसा कानून को लेकर प्रशासन और पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था आमने-सामने आ गए हैं. कर्रा प्रखंड में डुमरगड़ी ग्राम सभा के प्रधान जीत पाहन मुंडा को स्थानीय बीडीओ ने नोटिस भेजा है.
इस कार्रवाई के विरोध में ग्राम प्रधानों और पड़हा राजाओं ने एकजुट होकर मोर्चा खोल दिया है.
पंचायती राज विभाग की पूर्व निदेशक और आईआरएस अधिकारी तथा पेसा कानून की मूल भावना को लेकर आदिवासियों को गोलबंद करने की मुहिम में जुटीं निशा उरांव के नेतृत्व में पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था से जुड़े प्रतिनिधियों का एक दल ने मंगलवार को खूंटी उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की.
नोटिस पर उठे कानूनी सवाल
प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि कर्रा प्रखंड के बीडीओ द्वारा जारी नोटिस में किसी भी कानून या धारा का स्पष्ट उल्लेख नहीं है जबकि दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है. इससे प्रशासनिक प्रक्रिया और अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त से मांग की है कि ग्राम प्रधान को जारी नोटिस पर तत्काल रोक लगाई जाए. साथ ही पारंपरिक पदाधिकारियों के अधिकारों की रक्षा और ग्राम सभा की स्वायत्तता सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं.
पारंपरिक व्यवस्था में दखल का आरोप
निशा उरांव ने प्रशासन की कार्रवाई को पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था में हस्तक्षेप बताया. उनका कहना है कि ग्राम प्रधान और पाहन किसी सरकारी ढांचे के कर्मचारी नहीं होते, बल्कि वे परंपरागत प्रणाली के तहत काम करते हैं. ऐसे में प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा नोटिस जारी करना ग्राम सभा की स्वायत्तता के खिलाफ है.
उन्होंने यह भी कहा कि निर्वाचित जनप्रतिनिधि जैसे मुखिया सरकारी व्यवस्था के अंतर्गत आते हैं, जबकि ग्राम प्रधान पारंपरिक अधिकारों के आधार पर कार्य करते हैं. इस अंतर को समझे बिना की जा रही कार्रवाई से विवाद पैदा हो रहा है.
ग्राम प्रधान का आरोप
डुमरगड़ी ग्राम सभा के प्रधान जीत पाहन मुंडा ने भी अपनी परेशानी सामने रखी. उन्होंने आरोप लगाया कि एक समुदाय विशेष के लोग उन्हें लगातार प्रताड़ित कर रहे हैं और उनके अधिकारों पर सवाल उठा रहे हैं.
