रांची: राज्य के वित्तमंत्री राधाकृष्ण किशोर ने एक बार फिर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश को निशाने पर लिया है. उन्होंने कहा है कि जेटेट भाषा विवाद को लेकर अभी तक यह नहीं पता चला कि हमारी पार्टी कांग्रेस का इस मुद्दे पर रुख क्या है.
उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थिति में वह और सहयोगी मंत्री दीपिका पांडेय सिंह अपने विवेक से पार्टी का पक्ष कमिटी के सामने रख देंगे. सरकार ने जेटेट में भाषा विवाद को सुलझाने के लिए मंत्रियों की एक कमेटी गठित की है, जिसकी अगुवाई राधाकृष्ण किशोर कर रहे हैं.
इसमें कांग्रेस कोटा की मंत्री दीपिका सिंह पांडेय और झामुमो कोटा के मंत्री सुदिव्य कुमार, योगेंद्र प्रसाद के अलावा राजद के संजय प्रसाद यादव शामिल हैं. सोमवार को कमेटी की पहली बैठक हुई थी, जिसमें मंत्रियों ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग और अधिकारियों से कई बिंदुओं पर जवाब तलब की है.
इस बैठक के बाद वित्त मंत्री ने कहा कि जेटेट भाषा विवाद को दूर करने के लिए बनीं कमिटी के संयोजक के नाते केशव महतो कमलेश से पार्टी का इस मुद्दे पर पक्ष जानकर कोई गुनाह नहीं कर दिया है. उन्होंने कहा कि जब समय आएगा जब पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को भी बताएंगे कि जनहित के मुद्दे पर कैसे प्रदेश नेतृत्व चुप्पी साधे रहता है.
वित्तमंत्री ने कहा कि यह सही है कि राज्य में गठबंधन दल के मुखिया मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन हैं. उनका निर्णय अंतिम होगा लेकिन एक राजनीतिक दल होने के नाते क्या हम महत्वपूर्ण मुद्दों पर चुप रहेंगे.
पुत्र मोह के आरोप पर
राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि कुछ लोग हम पर पुत्रमोह का आरोप लगाते हैं. ऐसे लोगों से मेरा कहना है कि अगर मेरा बेटा पार्टी को सींच रहा है, मेहनत कर रहा है, पार्टी का जनाधार बढ़ा रहा है तो क्या उसे सिर्फ इसलिए नजरअंदाज कर देना चाहिए, क्योंकि वह राधाकृष्ण किशोर का बेटा है.
उन्होंने कहा कि वर्तमान कमिटी में कितने नेताओं के बेटा-बेटी, पत्नी, भाई और अन्य सगे संबंधियों को जगह मिली है, यह किसी से छुपी है क्या? उन्होंने केशव महतो कमलेश की जम्बोजेट प्रदेश कांग्रेस कमिटी पर तंज कसते हुए कहा कि इतनी बड़ी कमिटी से तो 2029 में पार्टी को 32 विधानसभा सीटों पर जीत मिलनी चाहिए. उन्होने कहा कि जब इतना ही संगठन का काम हुआ है तो बन्ना गुप्ता की पत्नी को छोड़ बाकी जगहों पर नगर निकाय चुनाव में हमारी भद्द क्यों पिट गयी?
