रांचीः झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक और पत्र लिखा है. इसमें उन्होंने चतरा जेलर लवकुश कुमार के कथित कारनामे की जानकारी दी है. पत्र में बताया है कि चतरा के जेलर ने लंबं समय तक एक महिला होमगार्ड का कथित यौन शोषण कर उसकी जिंदगी तबाह कर दी.
महिला होमगार्ड के पति ने जब इसका विरोध किया, तो उसे रास्ते से हटाने के लिए गुंडे भेजे गए, जान से मारने की धमकियां दी गईं और झूठे मुकदमों में फँसाने का भय दिखाकर वर्षों तक उस महिला का शारीरिक और मानसिक शोषण किया जाता रहा.
बाबूलाल ने पत्र के जरिये मुख्यमंत्री को बताया है कि जेलर लवकुश कुमार वर्षों से अपनी वर्दी, पद और सत्ता के रौब का दुरुपयोग कर महिलाओं का घोर शोषण करने का आदी रहा है. यह कोई साधारण चरित्रहीनता का मामला नहीं है, बल्कि सरकारी पद की ताकत का इस्तेमाल कर महिलाओं को डराने, दबाने और उनका जीवन बर्बाद करने का एक संगठित संस्थागत अपराध है.
बाबूलाल ने सीएम को लिखा है, “मेरे समक्ष एक पीड़ित परिवार की जो व्यथा आई है, वह आपके शासन की कानून-व्यवस्था का जनाज़ा निकालती है. इस जेलर ने एक महिला गृह रक्षक (होमगार्ड) के साथ अनैतिक संबंध बनाए और उसकी पूरी जिंदगी तबाह कर दी. उस पीड़ित महिला के पति और भाई ने आपसे लेकर शासन के तमाम आला अधिकारियों तक न्याय की गुहार लगाई, लेकिन आपके पूरे तंत्र ने पीड़ित परिवार की रक्षा करने के बजाय आरोपी जेलर की ढाल बनकर काम किया.”
इससे भी अधिक शर्मनाक और पीड़ादायक तथ्य यह है कि बिरसा मुंडा कारागार के अधीक्षक कुमार चंद्रशेखर ने इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय, उस पीड़ित पति को चंद रुपयों की रिश्वत लेकर अपनी पत्नी का यौन शोषण “सहन” करने की घिनौनी सलाह दी। यह केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं है, बल्कि आपकी पूरी सरकार और व्यवस्था के गहरे नैतिक पतन का सबसे बड़ा प्रमाण है।
जेलर के और भी हैं कारनामे
बाबूलाल मरांडी ने आगे कहा है, लवकुश कुमार के कारनामों की सूची यहीं समाप्त नहीं होती. इसके विवाह से पूर्व एक महिला द्वारा इसके घर पहुँचकर अपने और इसके नाजायज़ बच्चे को लेकर हंगामा करने की चर्चाएँ भी लंबे समय से सार्वजनिक रही हैं. प्रश्न यह उठता है कि आखिर ऐसे आपराधिक आचरण वाले व्यक्ति को कारागार जैसी संवेदनशील जिम्मेदारी किसके संरक्षण में दी गई है?
रांची के जेल अधीक्षक भी निशाने पर
गौरतलब है कि हाल ही में बाबूलाल मरांडी ने सीएम को एक पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार के अधीक्षक चंद्रशेखर ने एक महिला बंदी के साथ यौन शोषण कर गर्भवती कर दिया है.
फिलहाल उस मामले में झालसा के निर्देश पर जांच जारी है. रांची जिले के उपायुक्त ने भी अलग से जांच कमेटी बनाई है. जबकि हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया है. बाबूलाल ने आरोप लगाया है कि जेल अधीक्षक मामले को दबाने के लिए पीड़ित महिला बंदी के घर वालों को कथित तौर पर पैसे देकर और प्रभाव जमाकर मामले को दबाने में जुटाने हैं.
घरलू विवाद नहीं संगठित अपराध
बाबूलाल ने पत्र में लिखा है, मुख्यमंत्री जी, यह कोई निजी या घरेलू विवाद नहीं है. यह एक जेलर और काराधीक्षक द्वारा अपने पद, सत्ता और वर्दी का इस्तेमाल कर महिला कर्मियों एवं कैदियों के यौन शोषण, धमकी, भय और भ्रष्टाचार का एक खुला संगठित अपराध है. मैं अभी इनके कुकृत्यों की केवल एक छोटी सी झलक ही सार्वजनिक कर रहा हूँ. बाकी अत्यंत गंभीर दस्तावेज, प्रमाण और शिकायतें अलग से प्रेषित की जा रही हैं. ऐसे दागी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच बैठाई जाए और इन्हें सीधे जेल भेजा जाए.
