रांचीः डिलिस्टिंग और धर्मांतरण जैसे मुद्दों पर इन दिनों तल्ख तेवर दिखाने वाले भाजपा के नेता तथा पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने झारखंड में चर्च को निशाने पर लिया है.
सोशल मीडिया पर चंपाई सोरेन के एक पोस्ट पर प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है.
चंपाई सोरेन ने सवालिया लहजे में कहा है, जब आदिवासी प्रकृति पूजक होते हैं तो झारखंड में 5,000 से ज्यादा चर्च क्यों बनाये गए हैं? क्या उन चर्चों में मरांग बुरु या सिंगबोंगा की पूजा होती है?
गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन लगातार डीलिस्टिंग की मांग करते आ रहे हैं. इनके अलावा भाजपा के नेता लगातार इन बातों पर जोर देते रहे हैं कि सरना और सनातन एक है. वहीं, कांग्रेस इसका विरोध करती रही है कि सरना और सनातन एक नहीं हैं.
हाल ही में बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस और झामुमो पर आदिवासी समाज को बांटने और तोड़ने की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला किया है. इसके साथ ही इस बात पर जोर दिया है कि सरना, सनातन और हिंदू में कोई अंतर नहीं है.
रविवार, 24 मई को दिल्ली में आयोजित जनजातीय सांस्कृतिक समागम को लेकर भी झारखंड में कांग्रेस और बीजेपी के बीच तीखी बयानबाजी होती रही.
बाबूलाल मरांडी ने यह भी कहा था कि कांग्रेस और झामुमो की आदिवासी समाज को बांटने और मूल आदिवासी अधिकारों को कमजोर करने की साजिश कतई सफल नहीं होगी.
इस बीच चंपाई सोरेन के इस पोस्ट ने सियासत में गर्मी और बढ़ा दी है.
