उद्धव ठाकरे अपनी पार्टी शिव सेना (यूबीटी) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे की शिवसेना में जाने के संकेतों के बीच भावुक अपील के साथ पार्टी प्रमुख के पद से इस्तीफे की पेशकश को लेकर शिवसेना की राजनीति में हलचल है और इसके राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं.
महाराष्ट्र में शुक्रवार को शिव सेना का 60वां का स्थापना दिवस समारोह पार्टी के दोनों धड़ों के बीच ज़ुबानी जंग का अखाड़ा बना रहा.
एक तरफ उद्धव पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील करते दिखे, दूसरी तरफ शिव सेना के प्रमुख एकनाथ शिंदे ने दावा किया कि उनकी पार्टी ही बाला साहेब ठाकरे की पार्टी की असली वारिस है.
क्या कहा उद्धव ने
उन्होंने कहा कि अगर पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को लगता है कि पार्टी छोड़कर गए सांसदों की ओर से उन पर लगाए गए आरोप सही हैं तो वो पार्टी प्रमुख का पद छोड़ने को तैयार हैं.
कार्यक्रम में उद्धव ठाकरे ने शिव सेना की ओर पार्टी के छह सांसदों को अपने पाले में लाने की कोशिश की ओर इशारा करते हुए कहा कि अगर पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को उनके ख़िलाफ़ लगाए जा रहे आरोपों पर विश्वास है तो वो पार्टी प्रमुख नहीं रहेंगे.
उन्होंने कहा, “पिछले 12-13 साल से मैं एक नेता के तौर पर आप लोगों की सुन रहा हूँ. लेकिन अगर आपको लगता है कि जो आरोप मुझ पर लगाए जा रहे हैं वो सच है तो मैं पार्टी प्रमुख से इस्तीफ़ा देने के लिए तैयार हूँ. लेकिन मेरे लिए एक चीज़ साफ़ है कि सोने की शिव सेना चोरों के हाथों नहीं सौंपी जानी चाहिए. मेरे अंदर नेता की बनने की लालसा नहीं है. मैं इस पद से इस्तीफ़ा देने के लिए तैयार हूँ.”
उन्होंने शिव सेना के ‘ऑपरेशन टाइगर’ को गंदी राजनीति क़रार दिया और उन आरोपों का भी खंडन किया कि शिव सेना (यूबीटी) कांग्रेस में विलय करने जा रही है.
एकनाथ शिंदे की शिव सेना ने उद्धव ठाकरे की शिव सेना को अपने पाले में लाने कोशिश को कथित तौर पर ‘ऑपरेशन टाइगर’ नाम दिया है.
शिव सेना (यूबीटी) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे की शिव सेना में जाने की ख़बरें हैं. पार्टी के संसदीय दल की बैठक में ये छह सांसद नहीं पहुँचे थे.
